रायपुर/नई दिल्ली। बंगाल की खाड़ी से उठे चक्रवाती तंत्र के कमजोर पड़ने के बावजूद देश भर में मानसूनी आफत थमने का नाम नहीं ले रही है, जिसका सबसे तीव्र असर छत्तीसगढ़ में देखने को मिल रहा है। राज्य में पिछले पांच दिनों से जारी मूसलाधार बारिश के चलते छोटे-बड़े सभी नदी-नाले उफान पर आ गए हैं। राजधानी रायपुर में खारून नदी का जलस्तर खतरे के निशान के करीब पहुंचने से निचले रिहायशी इलाकों में बाढ़ का पानी घुस चुका है, वहीं रायपुर-जगदलपुर नेशनल हाईवे के जलमग्न होने से बस्तर और राजधानी के बीच संपर्क बुरी तरह प्रभावित हुआ है। बस्तर संभाग में इंद्रावती नदी रौद्र रूप दिखा रही है, जहां कई गांवों के जलमग्न होने के बाद एनडीआरएफ की टीमों ने मोर्चा संभालकर प्रभावित ग्रामीणों को सुरक्षित ठिकानों तक पहुंचाया है।
छत्तीसगढ़ के साथ-साथ मौसम विभाग ने दिल्ली, उत्तर प्रदेश, बिहार, ओडिशा, झारखंड, पश्चिम बंगाल, तेलंगाना, मध्य प्रदेश, राजस्थान, पंजाब, हरियाणा, उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश सहित कुल 14 राज्यों में भारी बारिश का अलर्ट जारी किया है।
उत्तर प्रदेश में बारिश का असर सबसे विनाशकारी रहा है, जहां पिछले 60 घंटों से जारी बारिश के बीच विभिन्न हादसों में 13 लोगों की जान चली गई और 32 जिलों पर बाढ़ का खतरा मंडरा रहा है। राजधानी लखनऊ में हुसैनाबाद स्थित एक ऐतिहासिक गेट का हिस्सा ढहने के साथ-साथ कई जगह वाहनों पर पेड़ गिरने की घटनाएं सामने आईं। कानपुर और गोरखपुर में ड्रेनेज सिस्टम ध्वस्त होने से मुख्य मार्ग और बाजार पानी में समा गए हैं। वहीं, उन्नाव के पास गंगा एक्सप्रेसवे के टोल प्लाजा पर तीन फीट तक पानी जमा होने से यातायात बाधित हुआ, जिसे लेकर सियासी बयानबाजी भी तेज हो गई है। हालात की गंभीरता को देखते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने नेपाल सीमा से सटे जिलों में विशेष निगरानी और राहत एजेंसियों को 24 घंटे सतर्क रहने के निर्देश दिए हैं।
पड़ोसी राज्य बिहार में भी नेपाल के तराई क्षेत्रों और गंडक नदी के जलग्रहण इलाकों में हो रही मूसलाधार बारिश को देखते हुए हाई अलर्ट घोषित किया गया है। राज्य के मुख्य सचिव की अध्यक्षता में 17 संवेदनशील जिलों के प्रशासनिक अधिकारियों के साथ आपात समीक्षा बैठक कर एनडीआरएफ और एसडीआरएफ को मुस्तैद कर दिया गया है।
मैदानी इलाकों में बाढ़ और जलभराव के बीच उत्तर भारत और पूर्वोत्तर के पर्वतीय क्षेत्रों में मौसम ने करवट ले ली है। सिक्किम में बादल फटने की घटना के बाद रिंबी क्षेत्र में भारी मलबे से दर्जनों घर क्षतिग्रस्त हुए हैं, जहां युद्धस्तर पर राहत कार्य चलाया जा रहा है। उधर उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश की ऊंची चोटियों पर बारिश के साथ मौसम की पहली बर्फबारी शुरू हो गई है। हेमकुंड साहिब और केदारनाथ धाम में कड़ाके की ठंड और हिमपात के कारण चारधाम यात्रा दो दिनों के लिए स्थगित करनी पड़ी है, जबकि हिमाचल के किन्नौर में छितकुल के आसपास ताजा बर्फबारी से सेब की बागवानी को नुकसान पहुंचने की आशंका है।
