अम्बिकापुर..(सीतापुर/अनिल उपाध्याय)..प्राकृतिक पर्यावरण एवं संसाधनों के संरक्षण के लिए काम करने वाली केंद्र सरकार की संस्था एनजीटी द्वारा प्रतिबंध के बावजूद सीतापुर नगर समेत क्षेत्र में रेत तस्करी का अवैध कारोबार धड़ल्ले से चल रहा है। खनिज विभाग की मिलीभगत से रेत माफिया मांड नदी का सीना छलनी कर रेत का अवैध खनन एवं परिवहन कर रहे है। जिसे वो डिपो में डंप करने के बाद रात के अंधेरे में हाइवा जैसी बड़ी वाहनों में भरकर बाहर खपाते है। प्रतिबंध के बाद भी क्षेत्र में रेत तस्करी का यह काम इतने खुलेआम चल रहा है कि जिसे देखकर ऐसा लगता नही कि रेत माफियाओं में शासन प्रशासन का तनिक भी खौफ हो। वही दिनदहाड़े हो रहे रेत खनन एवं तस्करी की जानकारी होने के बाद भी प्रशासन एवं खनिज विभाग की चुप्पी से कई सवाल खड़े हो गये है। आखिर ऐसी क्या वजह है कि एनजीटी के प्रतिबंध के बाद भी क्षेत्र में रेत का अवैध खनन एवं तस्करी रुकने का नाम नही ले रही है।
गौरतलब है कि, एनजीटी द्वारा प्राकृतिक पर्यावरण एवं संसाधनों के संरक्षण हेतु नदी नालों से रेत खनन पर पूरी तरह प्रतिबंध लगा दिया है। इस प्रतिबंध के तहत विगत 10 जून से 15 अक्टूबर तक नदी नालों से रेत खनन एवं परिवहन पर पूरी तरह रोक रहेगा। इसके बाद भी क्षेत्र की जीवनदायिनी मांड नदी से रेत का अवैध खनन एवं परिवहन धड़ल्ले से किया जा रहा है। रेत माफिया एनजीटी के आदेशों की धज्जियां उड़ाते हुए मांड नदी का सीना छलनी कर रेत का अवैध खनन एवं परिवहन कर रहे है। इस काम के लिए रेत माफियाओं ने बड़ी वाहनों का सहारा नही लिया है ट्रैक्टरो के जरिये ये अपने इस काम को अंजाम दे रहे है। रेत माफियाओं ने ट्रैक्टर किराये पर लेकर इनके बीच क्षेत्र बाँट दिया है।जिसके आधार पर ट्रैक्टर वाले ग्राम रायकेरा, टोकोपारा, मंगरेलगढ़, नवाटोली, केसला, भिठुवा, ढेलसरा आदि से होकर बहने वाली मांड नदी से रेत का अवैध खनन करते हुए उसे डिपो में डंप करते है।
इस काम मे रेत माफियाओं ने ट्रैक्टर चालकों के बीच जो जितना ट्रिप लाएगा वो उतना बोनस पायेगा वाला स्किम भी चला रखा है। जिसकी वजह से सुबह होते ही ज्यादा बोनस के चक्कर में ट्रैक्टर सड़को पर मौत बनकर दौड़ने लगती है। ज्यादा बोनस के चक्कर मे होने वाली प्रतिस्पर्धा के चक्कर मे सुबह से लेकर शाम तक इनके तेज रफ्तार की वजह से हमेशा दुर्घटना की संभावना बनी रहती है। खासकर शहीद भगत सिंह चौक से केसला मांड नदी तक जाने वाली सड़क संकरा होने की वजह से यहाँ हमेशा जानलेवा दुर्घटना की संभावना बनी रहती है। सुबह से शाम तक ट्रैक्टर चालक अपने अलावा दुसरो का जीवन खतरे में डालकर मांड नदी से रेत खनन करने के बाद उसे ग्राम सोनातराई स्थित डिपो में डंप करते है। जहाँ से रात के अंधेरे में रेत माफिया हाइवा जैसी बड़ी वाहनों से उसे बाहर खपाते है। एनजीटी द्वारा प्रतिबंध लगाने के बाद भी खनिज विभाग और रेत विभाग के मिलीभगत से चल रहे रेत के अवैध कारोबार से जहाँ लाखों की कमाई हो रही है वही शासन को लाखों रुपये की राजस्व क्षति झेलनी पड़ रही है।
इस संबंध में नगर पंचायत के वार्ड क्र-7 केसला निवासियों का कहना है कि मांड नदी के लगातार हो रहे दोहन से नदी के सेहत पर काफी बुरा असर पड़ा है। उन्होंने कहा कि नदी का बहाव में बदलाव के साथ कटाव बढ़ गया है। जिसकी वजह से बारिश के दिनों में बाढ़ का पानी वार्ड में घुस जाता है। इसके अलावा रेत खनन की वजह से नदी में जगह-जगह जानलेवा गड्ढे बन गए हैं। जिसकी वजह से हमेशा दुर्घटना की आशंका बनी रहती है। इस संबंध में वार्डवासियों ने कई बार उच्चाधिकारियों को अवगत कराते हुए रेत खनन पर रोक लगाने की मांग की पर आज तक रोक नही लगी। जिसकी वजह से रेत माफियाओं का हौसला बुलन्द है और वो प्रतिबंध के बाद भी धड़ल्ले से मांड नदी से रेत का अवैध खनन एवं परिवहन कर रहे है।
इस संबंध में जिला खनिज अधिकारी अनिल कुमार साहू ने टीम भेजकर कार्यवाही की बात कही है।
