मुंबई। महाराष्ट्र की राजनीति में रविवार को उस वक्त बड़ा सियासी घटनाक्रम देखने को मिला जब मनसे प्रमुख राज ठाकरे और शिवसेना (यूबीटी) प्रमुख उद्धव ठाकरे एक साझा मंच पर नजर आए। दोनों दलों के संयुक्त नेतृत्व में मेट्रो सिनेमा से शुरू होकर मुंबई महानगरपालिका होते हुए आजाद मैदान तक विशाल ‘गर्जना विरोध मार्च’ निकाला गया। इस दौरान राज ठाकरे ने राज्य में एसआईआर प्रक्रिया को तुरंत रद्द करने और आगामी सभी चुनाव अनिवार्य रूप से बैलट पेपर से कराने की जोरदार मांग रखी।
आजाद मैदान में आयोजित सभा को संबोधित करते हुए मनसे प्रमुख राज ठाकरे ने चुनाव प्रक्रिया पर गंभीर सवाल खड़े किए। उन्होंने आरोप लगाया कि 2024 के विधानसभा चुनाव के दौरान महाराष्ट्र में अचानक 40 से 60 लाख मतदाता बढ़ गए, जिसके बाद एसआईआर के नाम पर राज्य में दो करोड़ और पूरे देश में करीब 13 करोड़ वैध मतदाताओं के नाम मनमाने ढंग से काट दिए गए। उन्होंने कहा कि विपक्ष को सत्ता में बैठे लोगों से नहीं, बल्कि जिस तरीके से वे सत्ता में आए हैं उससे सख्त एतराज है। इस पूरे घालमेल की सच्चाई सामने लाने के लिए एसआईआर को तत्काल प्रभाव से निरस्त कर चुनाव केवल बैलट पेपर से ही होने चाहिए।
वहीं, शिवसेना (यूबीटी) प्रमुख उद्धव ठाकरे ने एसआईआर को पूरी तरह से गैर-कानूनी करार देते हुए केंद्र सरकार को घेरा। उन्होंने कहा कि सरकार ने बांग्लादेशी घुसपैठियों के नाम हटाने के बहाने यह प्रक्रिया शुरू की थी, इसलिए अब केंद्र को सार्वजनिक रूप से यह आंकड़ा पेश करना चाहिए कि इसके जरिए वास्तव में कितने बांग्लादेशी पकड़े गए हैं। इसके साथ ही उन्होंने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार की नियुक्ति प्रक्रिया और उन्हें मिले कानूनी संरक्षण पर कड़ा एतराज जताते हुए कहा कि भविष्य में आने वाली सरकार उन पर मुकदमा दर्ज कर कार्रवाई करेगी, लेकिन वर्तमान सरकार को अपने संवैधानिक दायित्व का निर्वहन करते हुए उन्हें तत्काल पद से हटा देना चाहिए।
विपक्ष के इस साझा शक्ति प्रदर्शन में कांग्रेस के वरिष्ठ नेता बालासाहेब थोरात, विजय वडेट्टीवार, राकांपा (एसपी) के प्रदेश अध्यक्ष शशिकांत शिंदे, पूर्व गृहमंत्री अनिल देशमुख, जयंत पाटिल, शेकाप नेता जयंत पाटिल, शिवसेना सांसद संजय राउत और चंद्रकांत खैरे सहित कई विपक्षी दलों के वरिष्ठ नेता और भारी संख्या में कार्यकर्ता उपस्थित रहे।
