– मृतक के परिजन समेत ग्रामीणों ने की जांच की मांग
अम्बिकापुर..(सीतापुर/अनिल उपाध्याय)..फर्जी दस्तावेजों के जरिये मजदूरी भुगतान एवं डबरी निर्माण कार्य के लिए सुर्खियों में रहने वाला मनरेगा कार्यालय अब मृतक के नाम से डबरी निर्माण को लेकर सुर्खियों में है।चार साल पहले मर चुके व्यक्ति के नाम डबरी निर्माण कार्य की स्वीकृति प्रदान कर मनरेगा विभाग काफी सुर्खियां बटोर रहा है।हालांकि मृतक के नाम स्वीकृत डबरी बनकर तैयार हो गई लेकिन इस मामले का खुलासा होने के बाद अधिकारियों की भूमिका सवालों के घेरे में आ गई है।साल भर पूर्व संज्ञान में आने के बाद भी अधिकारियों ने मनरेगा योजना में हुए इस फर्जीवाड़े के विरुद्ध कोई कार्यवाही नहीं की।खुलासे के बाद इस मामले में कार्यवाही नहीं होने से नाराज पीड़ित पक्ष एवं ग्रामीणों ने आशंका जाहिर करते हुए कहा कि इस फर्जीवाड़े को सभी ने मिलकर अंजाम दिया है।तभी आज तक इसकी जांच नही की गई क्योंकि जांच होती तो कई इसके चपेट में आ जाते।उन्होंने उच्चाधिकारियों से जाँच की मांग की है ताकि मृत व्यक्ति के नाम पर स्वीकृत डबरी निर्माण की आड़ में हुये फर्जीवाड़े का खुलासा हो सके।
गौरतलब है कि ग्राम पंचायत बेलजोरा जंगलपारा निवासी सुखनाथ नागवंशी आ केहटा के नाम से सन 2024-25 में मनरेगा योजना के तहत लगभग तीन लाख की लागत से डबरी निर्माण कार्य स्वीकृत हुआ था।साल भर पहले जिस व्यक्ति सुखनाथ के नाम से डबरी स्वीकृत हुआ था उसकी चार साल पहले मौत हो गई थी।इसके बाद भी उसे जीवित बताकर फर्जी तरीके से उसके नाम से लाखों रुपए का डबरी निर्माण कार्य स्वीकृत करा लिया गया।इस फर्जीवाड़े का खुलासा तब हुआ जब आवास मित्र द्वारा मृतक की जमीन पर डबरी निर्माण कार्य शुरू कराया गया।इस संबंध में मृतक के पुत्र रामकुमार ने बताया कि उसके पिता अब इस दुनिया मे नही है उनकी चार साल पहले मौत हो चुकी है।उसने मृत पिता को जीवित बता उसके नाम से डबरी निर्माण कार्य स्वीकृत होने पर आश्चर्य जताते हुए कहा कि आवास मित्र ने उसके मृत पिता की नाम पर विश्वासघात किया है।उसने इस फर्जीवाड़े के लिए मनरेगा के मैदानी अमले के साथ प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत नियुक्त आवास मित्र को दोषी ठहराया है।
इस संबंध रामकुमार समेत ग्रामीणों ने बताया कि मृतक से जुड़े कई अहम दस्तावेज आवास मित्र के पास पहले से जमा थे।जिसकी आड़ में उसने अपनी पहुँच एवं पकड़ का फायदा उठाते हुए इस फर्जीवाड़े को अंजाम देते हुए मृत व्यक्ति के नाम डबरी निर्माण कार्य स्वीकृत करा लिया है।चूंकि आवास मित्र होने के नाते काम के सिलसिले में मनरेगा शाखा में उसका आना जाना लगा रहता है।जिसकी वजह से अधिकारी एवं कर्मचारियों के बीच उसकी अच्छी पकड़ है और उसने इसी का फायदा उठाते हुए इस फर्जीवाड़े को अंजाम दिया है।डबरी निर्माण को लेकर जब मृतक के पुत्र रामकुमार से पूछा गया तब उसने अनभिज्ञता जाहिर करते हुए बताया कि इस बारे में उसे या उसके परिवार के किसी भी सदस्य को पता नही है।
जब उनकी जमीन पर आवास मित्र द्वारा डबरी की खुदाई शुरू कराई गई तब उसे पता चला कि चार साल पहले मृत पिता के नाम से डबरी निर्माण कार्य स्वीकृत हुआ है।उसने इस पर अपना विरोध भी दर्ज कराया लेकिन आवास मित्र ने उसकी एक नही सुनी और डबरी बनाकर तैयार करा दिया।पीड़ित रामकुमार ने बताया कि इस डबरी निर्माण से मेरे या मेरे परिवार को कोई लाभ नही होगा बल्कि हमारी उपयोगी जमीन बेकार हो जायेगी।उसने कहा कि आवास मित्र ने अपने फायदे के लिए फर्जी तरीके से मृत पिता के नाम से डबरी निर्माण स्वीकृत कराया है ताकि वो अपनी झोली भर सके।बिना बताए आवास मित्र द्वारा मृत पिता के नाम से कराये गये डबरी निर्माण से परिवार नाखुश है।उन्होंने इसे एक गंभीर मामला बताते हुए कहा कि आवास मित्र ने हमारे भोलेपन का नाजायज फायदा उठाया है जिसकी जांच होनी चाहिए।साल भर पहले ग्राम पंचायत में डबरी निर्माण की आड़ में हुए इस फर्जीवाड़े का मामला काफी सुर्खियों में था।
गांव से होते हुए यह मामला जनपद पंचायत एवं मनरेगा के अधिकारियों के संज्ञान में भी आ गया था लेकिन इन्होंने इस पर कोई कार्यवाही नहीं की।जिसकी वजह से मृतक के परिवार समेत गांव के लोगों में असंतोष व्याप्त है।उन्होंने इस मामले में अधिकारियों पर मिलीभगत का आरोप लगा जांच की मांग की है।ताकि मृत व्यक्ति के नाम डबरी निर्माण की आड़ में फर्जीवाड़ा करने वालों के विरुद्ध कार्यवाही हो सके।
