जांजगीर-चांपा। जिला मुख्यालय जांजगीर में कलेक्टर चौक के पास संचालित श्री मल्टी स्पेशलिस्ट बर्न एवं ट्रामा सेंटर एक बार फिर कथित अनियमितताओं को लेकर सवालों के घेरे में है। अस्पताल में पार्किंग व्यवस्था, आयुष्मान योजना के काउंटर, मरीजों के उपचार की व्यवस्था और अस्पताल संचालन से जुड़े नियमों के पालन को लेकर शिकायतें सामने आई हैं। आरोप है कि इन समस्याओं के संबंध में सीएम हेल्पलाइन में शिकायत दर्ज कराए जाने के बाद स्वास्थ्य विभाग की टीम ने अस्पताल का निरीक्षण किया, जिसमें कई खामियां सामने आईं।
इसके बावजूद अस्पताल के खिलाफ अब तक कोई बड़ी कार्रवाई नहीं होने से स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठने लगे हैं। अस्पताल संचालक को सिर्फ नोटिस थमाया गया है। मामले को लेकर छत्तीसगढ़ के स्वास्थ्य मंत्री से शिकायत कर अस्पताल की निष्पक्ष एवं स्वतंत्र जांच कराने की मांग की गई है। शिकायतकर्ता ने रायपुर से स्वास्थ्य विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों की टीम गठित कर जांच कराने का आग्रह किया है, ताकि स्थानीय स्तर पर हो रही कार्रवाई की वास्तविकता सामने आ सके।
जांच में खामियां मिलने के बावजूद अस्पताल का संचालन जारी, कार्रवाई पर सवाल…
शिकायत के अनुसार, सीएम हेल्पलाइन में मामला पहुंचने के बाद स्वास्थ्य विभाग की टीम ने अस्पताल का निरीक्षण किया था। निरीक्षण के दौरान कुछ व्यवस्थागत कमियां सामने आने की बात कही जा रही है। आरोप है कि अस्पताल में पाई गई खामियों के बावजूद संचालक के विरुद्ध अपेक्षित सख्त कार्रवाई नहीं की गई।
यदि निरीक्षण के दौरान नियमों के उल्लंघन की पुष्टि हुई थी, तो विभाग ने अब तक क्या कार्रवाई की? क्या अस्पताल प्रबंधन को केवल निर्देश देकर छोड़ दिया गया? क्या उन निर्देशों का पालन सुनिश्चित करने के लिए दोबारा निरीक्षण किया गया? ये ऐसे सवाल हैं, जिनका जवाब स्वास्थ्य विभाग को देना चाहिए।
आयुष्मान काउंटर निर्धारित स्थान पर नहीं होने का मामला…
शिकायत में अस्पताल के आयुष्मान योजना से संबंधित काउंटर को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं। आरोप है कि निरीक्षण के दौरान आयुष्मान काउंटर निर्धारित या उपयुक्त स्थान पर नहीं पाया गया था। इसके बाद स्वास्थ्य विभाग की ओर से काउंटर को सामने की ओर निर्धारित स्थान पर रखने के निर्देश दिए जाने की बात सामने आई है।
अब सवाल यह है कि आयुष्मान योजना के तहत इलाज कराने आने वाले मरीजों को आवश्यक जानकारी और सुविधाएं आसानी से मिल रही हैं या नहीं। गरीब और जरूरतमंद मरीज सरकारी स्वास्थ्य योजनाओं के भरोसे अस्पताल पहुंचते हैं। ऐसे में योजना से संबंधित व्यवस्थाओं में पारदर्शिता और नियमों का पालन सुनिश्चित करना विभाग की जिम्मेदारी है।
जिला अस्पताल के डॉक्टर द्वारा उपचार करने का मामला भी उठा…
इस पूरे मामले में एक और गंभीर बिंदु सामने आया है। शिकायत के अनुसार, जिला अस्पताल में पदस्थ एक डॉक्टर द्वारा उक्त निजी अस्पताल में मरीजों का उपचार किए जाने का मामला सामने आया था। इस संबंध में स्वास्थ्य विभाग द्वारा कार्रवाई किए जाने की जानकारी दी गई है।
हालांकि, इस मामले में संबंधित डॉक्टर की भूमिका, निजी अस्पताल में उपचार करने की परिस्थितियों और विभागीय कार्रवाई के स्वरूप की आधिकारिक जानकारी सामने आना आवश्यक है। यदि सरकारी अस्पताल में पदस्थ चिकित्सक निजी संस्थान में सेवाएं दे रहे थे, तो यह भी स्पष्ट होना चाहिए कि ऐसा किन परिस्थितियों में किया जा रहा था और संबंधित नियमों के तहत क्या कार्रवाई की गई।
होम्योपैथिक योग्यता वाले डॉक्टर के नेतृत्व में मल्टी स्पेशलिटी अस्पताल, जांच जरूरी…
शिकायतकर्ता ने अस्पताल के संचालन से संबंधित चिकित्सकीय योग्यता और कानूनी प्रावधानों की जांच कराने की भी मांग की है। शिकायत में सवाल उठाया गया है कि अस्पताल के संचालन में होम्योपैथिक चिकित्सा पद्धति से संबंधित योग्यता रखने वाले डॉक्टर की क्या भूमिका है और क्या अस्पताल में संचालित सभी विभागों में उपचार करने वाले चिकित्सक निर्धारित योग्यता एवं पंजीयन रखते हैं।
यहां सबसे महत्वपूर्ण सवाल अस्पताल के नाम या संचालक की व्यक्तिगत योग्यता से अधिक यह है कि अस्पताल में बर्न, ट्रामा और अन्य विशेषज्ञ सेवाएं देने वाले चिकित्सक संबंधित चिकित्सा पद्धति में पंजीकृत एवं योग्य हैं या नहीं। अस्पताल के पंजीयन, संचालन की अनुमति, विशेषज्ञ चिकित्सकों की उपलब्धता और आवश्यक लाइसेंस की जांच कर वास्तविक स्थिति स्पष्ट की जानी चाहिए।
पार्किंग, मरीजों की सुविधाओं और बिलिंग को लेकर भी शिकायतें…
अस्पताल में पार्किंग व्यवस्था और अन्य बुनियादी सुविधाओं को लेकर भी शिकायतें की गई हैं। इसके अलावा, मरीजों से उपचार के नाम पर अधिक राशि वसूलने अथवा बिलिंग में अनियमितता के आरोप भी शिकायतकर्ता ने लगाए हैं।
यदि मरीजों से निर्धारित दरों से अधिक राशि ली जा रही है या उपचार एवं जांच के नाम पर अनुचित बिलिंग की जा रही है, तो यह गंभीर विषय है। हालांकि, इन आरोपों की पुष्टि संबंधित बिल, भुगतान रसीद, मरीजों के बयान और विभागीय जांच के आधार पर ही हो सकती है।
स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़े किसी भी संस्थान में पारदर्शी बिलिंग, मरीजों को उपचार की स्पष्ट जानकारी, आपातकालीन सेवाओं की उपलब्धता और निर्धारित मानकों का पालन अनिवार्य महत्व रखता है। ऐसे में शिकायतों की निष्पक्ष जांच कराना आवश्यक है।
स्थानीय अधिकारियों की कार्रवाई पर सवाल, रायपुर से टीम भेजने की मांग…
शिकायतकर्ता का आरोप है कि बार-बार शिकायत किए जाने के बावजूद अस्पताल के विरुद्ध प्रभावी कार्रवाई नहीं की जा रही है। इसी वजह से अब स्वास्थ्य मंत्री से हस्तक्षेप की मांग की गई है।
शिकायत में आग्रह किया गया है कि रायपुर से स्वास्थ्य विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों की स्वतंत्र टीम भेजकर अस्पताल के सभी दस्तावेजों, चिकित्सकों की योग्यता, पंजीयन, लाइसेंस, आयुष्मान योजना से संबंधित व्यवस्था, मरीजों की बिलिंग और उपचार संबंधी रिकॉर्ड की जांच कराई जाए।
साथ ही, यह भी जांच होनी चाहिए कि पूर्व में निरीक्षण के दौरान क्या कमियां पाई गई थीं, अस्पताल प्रबंधन को क्या निर्देश दिए गए और उन निर्देशों का कितना पालन हुआ। यदि नियमों का उल्लंघन प्रमाणित होता है, तो संबंधित प्रावधानों के तहत कार्रवाई की जानी चाहिए।
मरीजों की जिंदगी से जुड़े मामले में लापरवाही की गुंजाइश नहीं…
अस्पताल का मामला केवल व्यवस्थागत कमियों तक सीमित नहीं है। यह मरीजों की सुरक्षा, उपचार की गुणवत्ता और स्वास्थ्य सेवाओं पर आम लोगों के भरोसे से जुड़ा विषय है। बर्न एवं ट्रामा सेंटर जैसे अस्पतालों में आपातकालीन परिस्थितियों में मरीज पहुंचते हैं, जहां उपचार में देरी या आवश्यक सुविधाओं की कमी गंभीर परिणाम पैदा कर सकती है। ऐसे में स्वास्थ्य विभाग को शिकायतों को सामान्य कागजी कार्रवाई मानकर छोड़ने के बजाय प्रत्येक आरोप की तथ्यात्मक जांच करनी चाहिए। यदि अस्पताल निर्धारित मानकों के अनुरूप संचालित हो रहा है, तो जांच से यह स्पष्ट हो जाएगा। वहीं, यदि गंभीर अनियमितताएं प्रमाणित होती हैं, तो जिम्मेदार लोगों के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई की जानी चाहिए।
