रायगढ़। छत्तीसगढ़ के रायगढ़ वनमंडल से एक बेहद भावुक और विचलित करने वाली खबर सामने आई है, जहाँ विकास की रफ्तार ने एक और बेजुबान की जान ले ली। घरघोड़ा वन परिक्षेत्र के चारमार गांव के पास रेलवे ट्रैक पार करते समय एक जंगली हाथी काल के गाल में समा गया। सोमवार रात करीब 10 बजे हुए इस भीषण हादसे में हाथी एक तेज रफ्तार मालगाड़ी की चपेट में आ गया था। टक्कर इतनी जोरदार थी कि हाथी का एक पैर बुरी तरह क्षत-विक्षत हो गया और शरीर से लगातार भारी मात्रा में खून बहने लगा। घटना की संवेदनशीलता को देखते हुए वन विभाग में हड़कंप मच गया और आनन-फानन में राहत कार्य शुरू किया गया।
हादसे की सूचना मिलते ही उप वन मंडलाधिकारी आशुतोष मंडावा और वन परिक्षेत्र अधिकारी विक्रांत सिंह अपनी रेस्क्यू टीम के साथ तुरंत मौके पर पहुंचे। घायल वन्यजीव की गंभीर स्थिति को देखते हुए चार अनुभवी पशु चिकित्सकों और वन्यजीव विशेषज्ञों की एक विशेष टीम को आपातकालीन इलाज के लिए तैनात किया गया। डॉक्टरों की इस टीम ने रात भर हाथी की जान बचाने के लिए हर संभव वेंटिलेशन और मेडिकल सपोर्ट दिया, लेकिन अंदरूनी चोटें और अत्यधिक रक्तस्राव उसकी सेहत पर भारी पड़ते गए। आखिरकार, तमाम कोशिशों और दुआओं के बाद भी मंगलवार सुबह इलाज के दौरान इस विशालकाय जीव ने दम तोड़ दिया।
इस दर्दनाक हादसे के वक्त ग्राउंड जीरो पर स्थिति काफी तनावपूर्ण और चुनौतीपूर्ण बनी हुई थी। वन विभाग के मुताबिक, जिस समय घायल हाथी ट्रैक पर तड़प रहा था, उसी दौरान उसके दल के पांच अन्य हाथी भी अपनों की तलाश में आसपास ही मंडरा रहे थे। हाथियों की मौजूदगी को देखते हुए वन अमले ने पूरे इलाके में अतिरिक्त सतर्कता बरतते हुए हाई अलर्ट जारी किया। ग्रामीणों की सुरक्षा के मद्देनजर मुनादी कराई गई और उन्हें हाथियों के झुंड से सुरक्षित दूरी बनाए रखने तथा घटनास्थल की ओर न जाने की सख्त हिदायत दी गई।
इस दुखद अंत पर गहरी संवेदना व्यक्त करते हुए वन विभाग के उच्च अधिकारियों ने कहा कि वन्यजीव को बचाने के लिए विभाग ने अपनी पूरी ताकत झोंक दी थी, लेकिन प्रकृति को कुछ और ही मंजूर था। गंभीर रूप से घायल हाथी को बचा पाना डॉक्टरों के लिए भी एक बड़ी चुनौती साबित हुआ। फिलहाल, वन विभाग स्थापित नियमों और तय गाइडलाइंस के तहत आगे की वैधानिक कार्रवाई कर रहा है, साथ ही रेलवे और वन विभाग की संयुक्त टीम इस बात की भी गहन जांच करेगी कि इस रूट पर ट्रेनों की रफ्तार और हाथियों की आवाजाही को लेकर समन्वय में कहाँ चूक हुई।
