बलरामपुर..(कृष्णमोहन कुमार)..शंकरगढ़ थाना क्षेत्र के जारगिम में कल (बुधवार) शाम सड़क दुर्घटना में घायलों को हायर सेंटर रिफर किया गया था और घायलों को जिस तरीके से ले जाया गया, वह नजारा ही अपने आप में पीड़ादायक था। जो स्वास्थ्य विभाग के तमाम दावों की पोल खोल करकर रख देता है। जिले के ब्लॉक मुख्यालयों के सरकारी अस्पताल आज भी संजीवनी 108 के भरोसे है। अस्पतालों को आबंटित एंबुलेंस विभागीय दाव पेंच के पचड़े में खड़े-खड़े कबाड़ में तब्दील हो रहे है।
दरअसल, कल शाम खेत में धान रोपाई का काम करके महिलाएं पिकअप वाहन में सवार होकर अपने घरों को लौट रही थी। इसी दौरान पिकअप वाहन अनियंत्रित होकर पलट गई और इस दर्दनाक हादसे में मौके पर ही दो महिलाओं विमला नगेसिया, कामेश्वरी पैंकरा की मौत हो गई। हादसे के दौरान पिकअप में 20 से 22 महिलाएं सवार थी। इधर घटनाक्रम की सूचना पर शंकरगढ़ पुलिस मौके पर पहुंची और घायलों को शंकरगढ़ सरकारी अस्पताल लाया गया था। 10 घायलों में 04 की हालत नाजुक थी। जिन्हें डाक्टरों ने अम्बिकापुर मेडिकल कॉलेज रिफर किया, लेकिन यहां विभागीय व्यवस्थाओं की पोल खुलते देर नहीं लगी। एक एम्बुलेंस में 03 घायलों को ले जाया गया। 02 घायलों को तो एंबुलेंस में बेड नसीब हुआ, लेकिन 01 के हिस्से में एम्बुलेंस फर्स आया और उसे वैसे ही अम्बिकापुर ले जाया गया।
स्वास्थ्य विभाग में रिफर करने के बाद एम्बुलेंस की व्यवस्था की कमान संजीवनी 108 के भरोसे ही है। सरकारी अस्पतालों की एंबुलेंस कबाड़ में तब्दील हो चुकी है। अगर अस्पताल की एंबुलेंस की स्थिति सही सलामत होती, तो यह स्थिति निर्मित नहीं होती। सवाल तो यह है की आखिर एंबुलेंस में जगह नहीं थी तो तीसरे घायल के लिए अलग से एंबुलेंस उपलब्ध कराई जानी थी, ना की एक ही एंबुलेंस में 3 घायलों को ठूस कर ले जाया जाना था। सड़को की हालत किसी से छिपी नहीं है। ऐसे में घायल को फर्स पर लेटा कर ले जाया गया। यह सिर्फ लापरवाही नहीं बल्कि विभाग के हकीकत को बयां कर रही थी।
बता दें कि, स्वास्थ्य अमले में संजीवनी 108 के अलावा और भी कई एंबुलेंस है, जो सरकारी आंकड़ों में धरातल पर है तो जरूर। मगर सड़कों पर दौड़ती नजर नहीं आती। यह स्वास्थ्य विभाग की नाकामी का नतीजा है। जिसका खामियाजा आमजनों को भुगतना पड़ रहा है। सरकार स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर कार्ययोजनाएं बनाती रही है और दावे भी किये जाते रहे है कि व्यवस्थाएं दुरुस्त होंगी, लेकिन यह दुरुस्त व्यवस्था का ऐसा नमूना है। जहां एंबुलेंस बेसिक जरूरतों में शामिल है।
बहरहाल, स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों को अपने विभाग के एंबुलेंस को दुरुस्त करने की आवश्यकता है, ताकि ऐसे घटनाक्रमों की पुनरावृत्ति ना हो।
