नई दिल्ली। अयोध्या के भव्य राम मंदिर में चढ़ावे की चोरी और वित्तीय अनियमितताओं के आरोपों की जांच कर रही विशेष जांच टीम (SIT) ने छह दिनों की गहन पड़ताल के बाद अपनी प्रारंभिक रिपोर्ट तैयार कर ली है। लखनऊ के मंडलायुक्त विजय विश्वास पंत के नेतृत्व में गठित इस उच्च स्तरीय टीम ने शनिवार शाम लखनऊ लौटने से पहले करीब 150 लोगों से पूछताछ की और मंदिर प्रबंधन से जुड़े महत्वपूर्ण दस्तावेजों को खंगाला। सोमवार सुबह 11 बजे यह रिपोर्ट मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को सौंपी जानी है। सूत्रों के मुताबिक, जांच में कदम-कदम पर गंभीर प्रशासनिक खामियां और वित्तीय विसंगतियां सामने आई हैं। स्थिति की गंभीरता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि पूछताछ के दौरान श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के शीर्ष पदाधिकारी महासचिव चंपत राय, अनिल मिश्रा और गोपाल राव दावों और प्रतिदावों के बीच एसआईटी के सामने ही एक-दूसरे पर जिम्मेदारी डालते नजर आए।
इस पूरे सियासी और प्रशासनिक हड़कंप की शुरुआत समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव के एक सोशल मीडिया पोस्ट से हुई थी, जिसमें उन्होंने मंदिर के चढ़ावे से करोड़ों रुपये गायब होने का आरोप लगाते हुए अदालत से स्वतः संज्ञान लेने की मांग की थी। शुरुआत में ट्रस्ट ने इन आरोपों को सिरे से खारिज किया, लेकिन विवाद तब और गहरा गया जब राम मंदिर के पूर्व लेखा प्रभारी और विश्व हिंदू परिषद के नेता महिपाल सिंह ने सनसनीखेज खुलासे कर दिए। महिपाल सिंह ने सीधे चंपत राय और गोपाल राव को निशाने पर लेते हुए दावा किया कि उन्होंने साल 2021 में खुद पांच लाख रुपये की चोरी पकड़ी थी और जब उन्होंने नोटों की गलत गिनती के जरिए हो रही इस हेराफेरी की शिकायत उच्चाधिकारियों से की, तो उन्हें ही पद से हटा दिया गया। यही नहीं, यह भी आरोप सामने आया कि साक्ष्यों को मिटाने के लिए सीसीटीवी फुटेज तक डिलीट कर दिए गए, जिसने विवाद में घी का काम किया और इसके बाद आम आदमी पार्टी व कांग्रेस ने भी मोर्चे खोल दिए।विपक्ष के हमलों और संतों के बढ़ते आक्रोश के बीच दिल्ली के विशेष निर्देश पर निर्माण समिति के अध्यक्ष नृपेंद्र मिश्रा के अचानक अयोध्या पहुंचने से ट्रस्ट पूरी तरह बैकफुट पर आ गया। राम मंदिर आंदोलन के अगुआ रहे पूर्व सांसद विनय कटियार और संत संतोष दुबे द्वारा सीधे चंपत राय की भूमिका पर सवाल उठाने के बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मामले को गंभीरता से लेते हुए तीन सदस्यीय एसआईटी का गठन किया था। जांच के दौरान जैसे-जैसे परतें खुलीं, गड़बड़ियों का दायरा बढ़ता चला गया। सोना-कांच के ब्योरे में भारी विसंगतियां पाई गईं, क्योंकि दान में मिली इन कीमती धातुओं का कोई पुख्ता रिकॉर्ड ही नहीं रखा जा रहा था। इसके बाद एसआईटी ने न सिर्फ चढ़ावे, बल्कि ट्रस्ट के धन से विभिन्न स्थानों पर चल रहे निर्माण कार्यों, सामग्री आपूर्ति और जमीनों की खरीद-फरोख्त को भी जांच के दायरे में शामिल कर लिया। चंपत राय के करीबी सहयोगियों से लेकर ठेकेदारों तक की संपत्तियों का ब्योरा तलब किया गया है।
विपक्ष के हमलों और संतों के बढ़ते आक्रोश के बीच दिल्ली के विशेष निर्देश पर निर्माण समिति के अध्यक्ष नृपेंद्र मिश्रा के अचानक अयोध्या पहुंचने से ट्रस्ट पूरी तरह बैकफुट पर आ गया। राम मंदिर आंदोलन के अगुआ रहे पूर्व सांसद विनय कटियार और संत संतोष दुबे द्वारा सीधे चंपत राय की भूमिका पर सवाल उठाने के बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मामले को गंभीरता से लेते हुए तीन सदस्यीय एसआईटी का गठन किया था। जांच के दौरान जैसे-जैसे परतें खुलीं, गड़बड़ियों का दायरा बढ़ता चला गया। सोना-कांच के ब्योरे में भारी विसंगतियां पाई गईं, क्योंकि दान में मिली इन कीमती धातुओं का कोई पुख्ता रिकॉर्ड ही नहीं रखा जा रहा था। इसके बाद एसआईटी ने न सिर्फ चढ़ावे, बल्कि ट्रस्ट के धन से विभिन्न स्थानों पर चल रहे निर्माण कार्यों, सामग्री आपूर्ति और जमीनों की खरीद-फरोख्त को भी जांच के दायरे में शामिल कर लिया। चंपत राय के करीबी सहयोगियों से लेकर ठेकेदारों तक की संपत्तियों का ब्योरा तलब किया गया है।इस बीच, निर्माण समिति के अध्यक्ष नृपेंद्र मिश्रा के एक हालिया बयान ने इस पूरी जांच को निर्णायक मोड़ पर ला खड़ा किया है। नृपेंद्र मिश्रा ने विभिन्न चैनलों को दिए साक्षात्कार में चढ़ावे की इस हेराफेरी को ‘चोरी’ नहीं बल्कि ‘डाका’ करार देकर एक तरह से विपक्ष के आरोपों पर मुहर लगा दी है। उन्होंने स्पष्ट किया कि मंदिर प्रबंधन में तय नियमों का दस प्रतिशत भी पालन नहीं किया जा रहा था। नृपेंद्र मिश्रा के इस तीखे रुख और एसआईटी को मिले पुख्ता सबूतों के बाद अब प्रशासनिक गलियारों में बड़े बदलाव की सुगबुगाहट तेज है। माना जा रहा है कि सोमवार को रिपोर्ट मिलते ही मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ राम मंदिर ट्रस्ट की पूरी व्यवस्था को बदलने या बड़े स्तर पर अधिकारियों पर गाज गिराने जैसा कोई कड़ा फैसला ले सकते हैं। दो दिन पूर्व स्वयं अयोध्या का दौरा कर चुके मुख्यमंत्री ने स्पष्ट संदेश दिया है कि एसआईटी की इस रिपोर्ट से दूध का दूध और पानी का पानी हो जाएगा।
इस बीच, निर्माण समिति के अध्यक्ष नृपेंद्र मिश्रा के एक हालिया बयान ने इस पूरी जांच को निर्णायक मोड़ पर ला खड़ा किया है। नृपेंद्र मिश्रा ने विभिन्न चैनलों को दिए साक्षात्कार में चढ़ावे की इस हेराफेरी को ‘चोरी’ नहीं बल्कि ‘डाका’ करार देकर एक तरह से विपक्ष के आरोपों पर मुहर लगा दी है। उन्होंने स्पष्ट किया कि मंदिर प्रबंधन में तय नियमों का दस प्रतिशत भी पालन नहीं किया जा रहा था। नृपेंद्र मिश्रा के इस तीखे रुख और एसआईटी को मिले पुख्ता सबूतों के बाद अब प्रशासनिक गलियारों में बड़े बदलाव की सुगबुगाहट तेज है। माना जा रहा है कि सोमवार को रिपोर्ट मिलते ही मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ राम मंदिर ट्रस्ट की पूरी व्यवस्था को बदलने या बड़े स्तर पर अधिकारियों पर गाज गिराने जैसा कोई कड़ा फैसला ले सकते हैं। दो दिन पूर्व स्वयं अयोध्या का दौरा कर चुके मुख्यमंत्री ने स्पष्ट संदेश दिया है कि एसआईटी की इस रिपोर्ट से दूध का दूध और पानी का पानी हो जाएगा।
