जांजगीर चाम्पा. जिला मुख्यालय के कई निजी स्कूलों में शिक्षकों के वेतन भुगतान को लेकर बड़े वित्तीय फर्जीवाड़े की चर्चाएं सामने आ रही हैं। आरोप है कि कुछ स्कूल प्रबंधन रिकॉर्ड और बैंक दस्तावेजों में शिक्षकों का वेतन 20 से 25 हजार रुपये प्रतिमाह दर्शाते हैं, जबकि वास्तविकता में कई शिक्षकों को शुरुआती स्तर पर मात्र 3 से 5 हजार रुपये नकद देकर काम कराया जाता है।
बताया जा रहा है कि बैंक खातों में अधिक वेतन का लेन-देन दिखाकर बाद में राशि वापस लेने या अन्य तरीकों से हिसाब-किताब समायोजित करने का खेल चलता है। यदि यह आरोप सही पाए जाते हैं, तो यह केवल श्रम कानूनों का उल्लंघन नहीं बल्कि आयकर और वित्तीय अनियमितताओं का भी गंभीर मामला हो सकता है। सूत्रों के अनुसार इस पूरे खेल में कुछ बैंक कर्मियों की मिलीभगत होने की भी चर्चा है, जिसकी निष्पक्ष जांच आवश्यक बताई जा रही है।
शिक्षकों का कहना है कि कम वेतन में उनसे पूरा काम लिया जाता है, लेकिन कागजों में अधिक वेतन दिखाकर स्कूल अपनी वित्तीय स्थिति और खर्च को अलग तरीके से प्रस्तुत करते हैं। इससे शिक्षकों का आर्थिक शोषण होने के साथ-साथ सरकारी राजस्व को भी नुकसान पहुंचने की आशंका है।
यदि आयकर विभाग, श्रम विभाग, शिक्षा विभाग और जिला प्रशासन संयुक्त रूप से वेतन रजिस्टर, बैंक स्टेटमेंट, आयकर रिटर्न और शिक्षकों के बयान की जांच करें, तो कई बड़े निजी स्कूलों की कार्यप्रणाली पर बड़ा खुलासा हो सकता है। फिलहाल इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है और जांच के बाद ही वास्तविक स्थिति स्पष्ट होगी।
