स्पोर्ट्स डेस्क। पिछले कुछ दिनों से जिन पर आलोचनाओं के तीर चल रहे थे, श्रीलंका ए के खिलाड़ियों के साथ मैदान पर जिसकी तीखी नोकझोंक सुर्खियां बटोर रही थी, उसी 15 साल के युवा सनसनी ने फाइनल के सबसे बड़े मंच पर ऐसा विस्फोट किया कि पूरा क्रिकेट जगत स्तब्ध रह गया। इंडिया ए के सलामी बल्लेबाज वैभव सूर्यवंशी ने श्रीलंका ए के खिलाफ ट्राई सीरीज के खिताबी मुकाबले में दांबुला के मैदान पर वह कर दिखाया, जो लिस्ट-ए क्रिकेट के इतिहास में आज तक नहीं हुआ था। टॉस जीतकर पहले गेंदबाजी करने उतरी श्रीलंकाई टीम के कप्तान सहान अराचिगे का फैसला उस वक्त आत्मघाती साबित हुआ, जब वैभव ने पहली ही गेंद पर मोहम्मद शिराज को चौका जड़कर अपने इरादे जाहिर कर दिए। इसके बाद तो मैदान पर चौकों-छक्कों का ऐसा बवंडर आया जिसने मेजबान गेंदबाजों को पूरी तरह असहाय कर दिया। वैभव ने महज 11 गेंदों में अपनी पारी का पांचवां छक्का जड़कर न सिर्फ अपना अर्धशतक पूरा किया, बल्कि लिस्ट-ए क्रिकेट में दुनिया का सबसे तेज अर्धशतक लगाने का वर्ल्ड रिकॉर्ड अपने नाम कर लिया।
दांबुला के रंगीरी इंटरनेशनल स्टेडियम में खेली गई यह पारी इसलिए भी बेमिसाल रही क्योंकि वैभव दबाव को अवसर में बदलने की कला सीख चुके हैं। इस खिताबी मुकाबले से पहले वे खराब फॉर्म से जूझ रहे थे, लेकिन जब टीम को सबसे ज्यादा जरूरत थी, तब उनका बल्ला नहीं, बल्कि बारूद बरसा। हालांकि, यह युवा बल्लेबाज महज 6 रनों से अपने ऐतिहासिक शतक से चूक गया, लेकिन आउट होने से पहले उन्होंने 29 गेंदों पर 10 चौके और 8 गगनचुंबी छक्कों की बदौलत 94 रनों की ऐसी आतिशी पारी खेली, जिसने मैच की दिशा तय कर दी। उनकी इस पारी ने इंडिया ए को वो मजबूत शुरुआत दी, जिसने फाइनल का पूरा मनोवैज्ञानिक दबाव श्रीलंका पर डाल दिया।
वैभव की इस 11 गेंदों वाली सुनामी ने क्रिकेट इतिहास के पन्नों को पलट कर रख दिया है। उन्होंने साल 2005/06 में श्रीलंका के ही कौशल्या वीररत्ने द्वारा बनाए गए करीब 20 साल पुराने रिकॉर्ड को ध्वस्त कर दिया, जिन्होंने कोलंबो में रागामा क्रिकेट क्लब के लिए खेलते हुए 12 गेंदों में अर्धशतक ठोका था। इस लिस्ट में श्रीलंका के ही दिग्गज थिसारा परेरा (13 गेंद) और दक्षिण अफ्रीका के रोरी क्लेनवेल्ट (14 गेंद) जैसे नाम शामिल थे, जिन्हें पछाड़कर अब भारत का यह युवा बल्लेबाज शीर्ष पर काबिज हो गया है।
इस ऐतिहासिक और हाई-वोल्टेज मुकाबले के लिए इंडिया ए की कमान तिलक वर्मा के हाथों में रही, जिसमें प्रियांश आर्य, रुतुराज गायकवाड़, विकेटकीपर कुमार कुशाग्र, सूर्यांश शेडगे, निशांत सिंधु, अनुकूल रॉय, विप्रज निगम, अशोक शर्मा और यश ठाकुर जैसे लड़ाके मैदान पर उतरे। वहीं, घरेलू परिस्थितियों का फायदा उठाने के इरादे से उतरी श्रीलंकाई टीम में विकेटकीपर निरोशन डिकवेला, अविष्का फर्नांडो, नुवानिदु फर्नांडो, सदीरा समरविक्रमा, रविंदु फर्नांडो, वानुजा सहान, मोहम्मद शिराज, विजयकांत वियास्कंथ, दुलज समुदिथा और कुगथास मथुलन शामिल रहे। लेकिन दांबुला की यह शाम पूरी तरह से वैभव सूर्यवंशी के नाम रही, जिन्होंने अपनी टाइमिंग और ताकत के दम पर आधुनिक क्रिकेट का एक नया अध्याय लिख दिया है।
