– सरदार पटेल की 150वीं जयंती पर एकता दौड़ में जनप्रतिनिधियों की सीमित मौजूदगी, पुलिस-प्रशासन ने निभाई जिम्मेदारी, सियासत के चेहरे नदारद
जांजगीर-चांपा। देश की एकता और अखंडता के लिए अपना पूरा जीवन समर्पित करने वाले लौह पुरुष सरदार वल्लभभाई पटेल की 150वीं जयंती पर जांजगीर में राष्ट्रीय एकता दिवस मनाया गया। पुलिस और प्रशासन ने एकता दौड़ आयोजित कर उनके योगदान को याद किया, लेकिन इस आयोजन में जनप्रतिनिधियों की सीमित मौजूदगी ने राजनीतिक गलियारों में कई सवाल खड़े कर दिए। सवाल यह है कि देश की एकता के शिल्पकार को याद करने के मौके पर राजनीतिक चेहरों की दूरी आखिर क्यों नजर आई?
31 अक्टूबर की सुबह नेताजी चौक से शुरू हुई एकता दौड़ में कलेक्टर जन्मेजय महोबे, एसपी विजय कुमार पाण्डेय, सहित पुलिस अधिकारी, प्रशासनिक अधिकारी, गणमान्य नागरिक और स्कूली विद्यार्थी शामिल हुए। दौड़ कचहरी चौक होते हुए हाईस्कूल मैदान स्थित सरदार पटेल गार्डन पहुंची, जहां प्रतिमा पर माल्यार्पण किया गया।
लेकिन इस आयोजन में जिले के कई बड़े राजनीतिक चेहरों की गैरमौजूदगी चर्चा का विषय रही। राजनीतिक मंचों पर महापुरुषों के नाम पर बड़े-बड़े भाषण देने वाले नेताओं की सक्रियता ऐसे आयोजनों में नजर क्यों नहीं आती? क्या महापुरुषों का सम्मान केवल भाषणों, पोस्टरों और राजनीतिक मंचों तक सीमित रह गया है?
विडंबना देखिए, राजनीतिक लाभ और श्रेय लेने की होड़ में नेता अक्सर आगे दिखाई देते हैं, लेकिन राष्ट्रीय एकता और राष्ट्र निर्माण के प्रतीक महापुरुष की जयंती पर उनकी उपस्थिति ही सीमित नजर आती है। सरदार पटेल ने सैकड़ों रियासतों को एक सूत्र में पिरोकर अखंड भारत की नींव मजबूत की थी। उनके नाम पर राजनीति करना आसान है, लेकिन उनके आदर्शों के प्रति सम्मान दिखाने के लिए ऐसे आयोजनों में शामिल होना भी जरूरी है।
अब सवाल जनता के सामने है कि महापुरुषों का सम्मान नेताओं के लिए केवल राजनीतिक जरूरत है या वास्तव में उनकी विचारधारा और योगदान के प्रति कोई जिम्मेदारी भी है?
