अम्बिकापुर। खेल मंचों से प्रतिभाओं को तराशने के दावों की जमीनी हकीकत उदयपुर में सीमेंट के सख्त फर्श पर टकराकर बिखर रही है। आधुनिक खेल सुविधाओं के दौर में भी यहां के बैडमिंटन खिलाड़ी सीमेंट के कठोर कोर्ट पर पसीना बहाने और अपने घुटने-टखने जोखिम में डालने को मजबूर हैं। विडंबना यह रही कि हाल ही में संपन्न सरगुजा ओलम्पिक जैसी ब्लॉक व जिला स्तरीय प्रतियोगिता भी इसी असुरक्षित सतह पर आयोजित करानी पड़ी, जिसने स्थानीय खेल अधोसंरचना की बदहाली को पूरी तरह उजागर कर दिया है।
तेज रफ्तार और फुर्तीले फुटवर्क की मांग करने वाले बैडमिंटन खेल में सीमेंट का फर्श खिलाड़ियों के लिए हमेशा बड़े खतरे का सबब बना रहता है। हर स्मैश और डाइव के दौरान खिलाड़ियों के घुटनों, टखनों और लिगामेंट्स पर अत्यधिक दबाव पड़ता है, जिससे करियर खत्म करने वाली गंभीर चोटों की आशंका हर वक्त बनी रहती है। सिंथेटिक या वुडन मैट और मौसम की मार से सुरक्षित इंडोर व्यवस्था न होने के कारण खिलाड़ी न तो अपनी पूरी क्षमता से अभ्यास कर पा रहे हैं, और न ही आधुनिक तकनीक अपना पा रहे हैं।
इस उपेक्षा के खिलाफ अब क्षेत्र के पदक विजेता खिलाड़ियों ने भी मोर्चा खोल दिया है। सरगुजा ओलम्पिक के विजेता मन्ना वर्मा और संजय बजरंगी सहित पूर्व चैंपियन जगदीश जायसवाल एवं अमित पटेल ने शासन-प्रशासन के समक्ष इंडोर स्टेडियम की पुरजोर मांग रखी है। खिलाड़ी के.पी. सिंह, मदन गोपाल सिंह, संदीप सोनी, अभिलाष और आकाश का दो-टूक कहना है कि जब सरकारें पदकों की उम्मीद करती हैं, तो उन्हें बुनियादी सुरक्षा और संसाधन भी मुहैया कराने चाहिए। खुले और सीमेंटेड कोर्ट पर अभ्यास कर राष्ट्रीय स्तर की प्रतिस्पर्धाओं में टिक पाना स्थानीय युवाओं के लिए नामुमकिन सा हो गया है।
उदयपुर में खेल के प्रति युवाओं का जबरदस्त रुझान है, किंतु सुविधाओं के अभाव में यह ऊर्जा दम तोड़ रही है। खिलाड़ियों ने प्रशासन व खेल विभाग से त्वरित पहल करने की मांग की है, ताकि क्षेत्र को जल्द सर्वसुविधायुक्त इंडोर बैडमिंटन स्टेडियम की सौगात मिल सके और यहां की छुपी प्रतिभाएं चोट के डर से मुक्त होकर राष्ट्रीय पटल पर क्षेत्र का नाम रोशन कर सकें।
