नई दिल्ली। राष्ट्रीय राजधानी में शनिवार को प्रस्तावित बड़े विरोध प्रदर्शन को देखते हुए सुरक्षा व्यवस्था चाक-चौबंद कर दी गई है। मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर जंतर-मंतर पर आयोजित इस प्रदर्शन में लगभग 7,000 प्रदर्शनकारियों के जुटने की आशंका है। स्थिति की संवेदनशीलता को देखते हुए प्रशासन ने शनिवार सुबह छह बजे से ही मध्य दिल्ली समेत कई प्रमुख इलाकों में कड़ी यातायात पाबंदियां लागू कर दी हैं। एहतियात के तौर पर राजधानी के कुछ संवेदनशील हिस्सों में मोबाइल इंटरनेट सेवाएं निलंबित कर दी गई हैं, कई प्रमुख मेट्रो स्टेशनों के प्रवेश और निकास द्वार बंद कर दिए गए हैं तथा चुनिंदा ट्रेनों के संचालन पर भी असर पड़ा है।
दिल्ली पुलिस मुख्यालय ने स्पष्ट कर दिया है कि राजधानी में किसी भी प्रकार के अनधिकृत जमावड़े की अनुमति नहीं दी जाएगी। वरिष्ठ अधिकारियों ने ज़मीनी स्तर पर तैनात जवानों को स्पष्ट निर्देश जारी किए हैं कि वे अत्यधिक संयम, अनुशासन और पेशेवर रवैया बनाए रखें। ब्रीफिंग के दौरान सुरक्षाकर्मियों को हिदायत दी गई है कि वे प्रदर्शनकारियों की ओर से की जाने वाली किसी भी उकसावे वाली कार्रवाई पर प्रतिक्रिया न दें और पूरे घटनाक्रम के दौरान शांति सुनिश्चित करें।
प्रदर्शन में शामिल होने आ रहे लोगों को हिरासत में लेकर पहले से चिन्हित हिरासत केंद्रों (डिटेंशन सेंटर्स) में भेजने की योजना तैयार की गई है। साथ ही, अधिकारियों ने यह भी स्पष्ट किया है कि यदि खुद को स्वतंत्र पत्रकार बताने वाले व्यक्ति पुलिसकर्मियों को उकसाने या टकराव की स्थिति पैदा करने का प्रयास करते हैं, तो उनके विरुद्ध भी नियमसम्मत कार्रवाई की जाएगी। प्रदर्शनकारियों को रामलीला मैदान स्थानांतरित किए जाने की अटकलों को खारिज करते हुए पुलिस ने साफ किया कि इसके लिए अब तक कोई औपचारिक आवेदन प्राप्त नहीं हुआ है।
दिल्ली यातायात पुलिस के अनुसार, कनॉट प्लेस, मंडी हाउस, जंतर-मंतर, पटेल चौक और आसपास के प्रमुख चौराहों पर भारी बैरिकेडिंग और सघन वाहन चेकिंग के कारण यातायात गंभीर रूप से प्रभावित रहेगा। वरिष्ठ पुलिस अधिकारी मौके पर रहकर पूरी स्थिति की सीधी निगरानी कर रहे हैं।
