धमतरी। शहर की धड़कन माने जाने वाले बालक चौक स्थित नगर निगम कॉम्प्लेक्स में इन दिनों व्यापार से ज्यादा चर्चा आवारा मवेशियों के आतंक की है। सुबह का सूरज उगते ही जब दुकानदार अपने कारोबार की शुरुआत के लिए कॉम्प्लेक्स पहुंचते हैं, तो उनका सामना ग्राहकों से नहीं बल्कि दुकानों की दहलीज पर बिखरे गोबर, गोमूत्र और भारी दुर्गंध से होता है। रोजी-रोटी की शुरुआत से पहले हर सुबह झाड़ू और पानी से परिसर धोना अब इन व्यापारियों की मजबूरी बन चुका है।
व्यापारिक हब होने के नाते बालक चौक पर सुबह से लेकर देर रात तक शहर और आसपास के ग्रामीण इलाकों से सैकड़ों लोगों की आवाजाही बनी रहती है। ऐसे में परिसर के भीतर और मुख्य सड़क पर डेरा जमाए मवेशी न केवल आवागमन को रोकते हैं, बल्कि अचानक आपस में भिड़कर राहगीरों, वाहन चालकों और ग्राहकों के लिए जानलेवा साबित होते हैं। कई बार ये मवेशी अनियंत्रित होकर दुकानों के भीतर तक घुस जाते हैं, जिससे न केवल सामान का नुकसान होता है बल्कि किसी बड़े हादसे का डर भी बना रहता है। पूर्व में मवेशियों की टक्कर से लोगों के लहूलुहान होने की घटनाएं भी सामने आ चुकी हैं।
स्थानीय व्यापारी रामकुमार वाधवानी, सोहन सोनकर और कैलाश साहू का कहना है कि बदबू और गंदगी के चलते ग्राहक यहां रुकने से कतराने लगे हैं, जिससे व्यापार सीधे तौर पर प्रभावित हो रहा है। नगर निगम को बार-बार गुहार लगाने के बाद भी अब तक कोई स्थायी हल नहीं निकल सका है। व्यापारियों ने दो-टूक मांग रखी है कि निगम नियमित धरपकड़ अभियान चलाए और मवेशियों को सड़कों पर लावारिस छोड़ने वाले पशुपालकों पर सख्त कानूनी व आर्थिक कार्रवाई करे। इधर, मामले पर नगर निगम आयुक्त अरुण कुमार वर्मा का कहना है कि शहर में बेसहारा मवेशियों की धरपकड़ के लिए जल्द ही एक विशेष अभियान की रूपरेखा तैयार की जा रही है, ताकि आम नागरिकों और व्यापारियों को इस समस्या से स्थायी निजात मिल सके।
