बलौदाबाजार। पंडित चक्रपाणि शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय में शराब पीकर आने वाले शिक्षक की शिकायत कवर करने पहुंचे पत्रकारों से तत्कालीन प्रभारी प्राचार्य द्वारा दुर्व्यवहार और बाद में उनके खिलाफ थाने में गंभीर व अनर्गल आरोप लगाने का सनसनीखेज मामला सामने आया है। इस मामले में प्रशासनिक हस्तक्षेप के बाद जहां शिक्षक के नशे में होने की चिकित्सीय पुष्टि हो चुकी है और प्राचार्य का प्रभार छीना जा चुका है, वहीं अब पत्रकारों को प्रताड़ित करने की नीयत से पुलिस में मनगढ़ंत शिकायत दर्ज कराई गई है।
घटना 17 सितंबर 2026 की है, जब विद्यालय के छात्रों ने आरोप लगाया कि शिक्षक नरेश तिवारी पिछले कई दिनों से शराब के नशे में स्कूल आ रहे हैं और छात्र-छात्राओं के साथ गाली-गलौज व अभद्र व्यवहार करते हैं। छात्रों का आरोप था कि प्राचार्य और शिक्षा विभाग में शिकायत के बावजूद कोई सुनवाई नहीं हुई, बल्कि शिक्षक द्वारा कक्षा बंद कर अपने पक्ष में बयान देने के लिए बच्चों पर दबाव बनाया जाने लगा। इस सूचना पर जिले के प्रमुख मीडिया प्रतिनिधि दीपेंद्र शुक्ला (NDTV), चंद्रकांत वर्मा (ETV भारत) और आशीष शुक्ला (BSTV) ग्राउंड रिपोर्टिंग के लिए स्कूल पहुंचे।
कवरेज के दौरान पत्रकारों ने जब प्राचार्य कक्ष में तत्कालीन प्रभारी प्राचार्य वंदना श्रीवास्तव से छात्रों की शिकायत और वस्तुस्थिति पर उनका पक्ष जानना चाहा, तो उन्होंने मीडिया से बात करने से इंकार करते हुए दुर्व्यवहार शुरू कर दिया। उन्होंने स्कूल परिसर में मीडिया का प्रवेश प्रतिबंधित होने की बात कहते हुए अभद्र लहजे में पत्रकारों को वहां से निकल जाने को कहा।
इसके बाद पत्रकारों ने तत्काल परिसर स्थित जिला शिक्षा अधिकारी (DEO) कार्यालय पहुंचकर सहायक संचालक आशीष तिवारी और प्रभारी डीईओ को पूरे घटनाक्रम से अवगत कराया। अधिकारियों की ओर से अनभिज्ञता जताए जाने पर मामले की जानकारी सीधे कलेक्टर कुलदीप शर्मा को दी गई। कलेक्टर ने मामले की गंभीरता को देखते हुए त्वरित संज्ञान लिया और तहसीलदार, बीईओ तथा डीईओ कार्यालय के अफसरों की संयुक्त टीम को जांच के लिए स्कूल रवाना किया।
तहसीलदार के निर्देश पर पुलिस ने आरोपी शिक्षक नरेश तिवारी का डॉक्टरी मुलाहिजा (मेडिकल परीक्षण) कराया, जिसमें उनके शराब के नशे में होने की आधिकारिक पुष्टि हुई। उधर, पत्रकारों के साथ हुए दुर्व्यवहार की खबर मिलते ही इलेक्ट्रॉनिक मीडिया संघ सहित जिलेभर के पत्रकार मौके पर पहुंचे और स्कूल प्रबंधन की मनमानी के खिलाफ कड़ा विरोध दर्ज कराया। अधिकारियों द्वारा 18 सितंबर तक कार्रवाई के लिखित आश्वासन के बाद ही पत्रकारों ने अपना विरोध समाप्त किया।
प्रशासनिक आश्वासन के अनुरूप 18 सितंबर को जिला शिक्षा अधिकारी ने त्वरित कार्रवाई करते हुए वंदना श्रीवास्तव को प्राचार्य के पद से हटा दिया और स्कूल की एक वरिष्ठ व्याख्याता को विद्यालय का नया प्रभार सौंप दिया।
प्रभार छिनने से बौखलाई पूर्व प्रभारी प्राचार्य ने 20 सितंबर को कोतवाली थाने में एक आवेदन देकर पत्रकारों पर ही झूठे आरोप मढ़ दिए। शिकायत में कवरेज करने पहुंचे पत्रकारों को बदनाम करने की नीयत से ‘बदमाश’, ‘हिस्ट्रीशीटर’, ‘ब्लैकमेलर’ और ‘लड़कियों की फोटो खींचने वाला’ जैसे आपत्तिजनक शब्दों का प्रयोग किया गया है। प्रेस बिरादरी ने इसे सच उजागर करने वाले पत्रकारों के खिलाफ दुर्भावनापूर्ण बदले की कार्रवाई बताते हुए निष्पक्ष जांच की मांग की है।
