जांजगीर-चाम्पा। कन्हाईबंद में कोयला भंडारण को लेकर चल रहा विवाद अब प्रशासनिक कार्रवाई तक पहुंच गया है। एक ओर जहां कलेक्टर जन्मेजय महोबे ने ग्राम कन्हाईबंद में कोयला भंडारण के लिए स्वीकृत अस्थायी अनुज्ञप्ति को नियमों एवं अनुबंध की शर्तों के उल्लंघन का हवाला देते हुए निरस्त कर दिया है, वहीं दूसरी ओर इसी तरह के एक अन्य प्रकरण में आवेदक पक्ष ने खनिज विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाते हुए न्यायालय में आवेदन प्रस्तुत किया है। पूरे मामले ने जिले में खनिज भंडारण की अनुमति और उसकी निगरानी व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
कलेक्टर द्वारा जारी आदेश के मुताबिक मेसर्स शारदा मां लॉजिस्टिक्स प्रा.लि. को ग्राम कन्हाईबंद की करीब 1.503 हेक्टेयर भूमि पर एक समय में अधिकतम 80 हजार मीट्रिक टन कोयला अस्थायी रूप से रखने की अनुमति दी गई थी। यह अनुज्ञप्ति 26 फरवरी 2020 से 25 फरवरी 2030 तक 10 वर्ष के लिए स्वीकृत थी। प्रशासन ने जांच में छत्तीसगढ़ खनिज (खनन, परिवहन तथा भंडारण) नियम, 2009 के नियम 14 में निर्धारित भंडारण शर्तों तथा अनुज्ञप्ति अनुबंध की शर्तों के उल्लंघन सहित अन्य अनियमितताएं पाए जाने का उल्लेख करते हुए अनुज्ञप्ति निरस्त की है।
दूसरी ओर मेंमर्स टर्टल सर्विसेस ग्राम कन्हाईबंद के खिलाफ ग्राम निवासी पांच लोगों ने कलेक्टर न्यायालय में आवेदन प्रस्तुत कर 19 हजार मीट्रिक टन कोयला भंडारण के लिए जारी अनुज्ञप्ति को निरस्त करने की मांग की है। आवेदकों ने अपनी शिकायत में भूमि के औद्योगिक व्यपवर्तन और न्यायालयीन आदेशों का हवाला देते हुए खनिज विभाग द्वारा जारी अनुमति की प्रक्रिया पर सवाल उठाए हैं।
कलेक्टर को दिए आवेदन के अनुसार ग्राम कन्हाईबंद, प.ह.नं. 3, तहसील जांजगीर की खसरा नंबर 660/2, 660/5, 660/6 एवं 660/8 की कुल करीब 1.77 एकड़ भूमि के संबंध में खनिज कोयले के अस्थायी भंडारण के लिए औद्योगिक प्रयोजन हेतु व्यपवर्तन का आवेदन किया गया था। आवेदन में दावा किया गया है कि इस संबंध में अनुविभागीय अधिकारी राजस्व जांजगीर द्वारा 25 जुलाई 2025 को औद्योगिक व्यपवर्तन आदेश पारित किया गया था।
आवेदकों का कहना है कि उक्त आदेश के खिलाफ अपील की गई, जिसके बाद न्यायालयीन प्रक्रिया में संबंधित आदेश को निरस्त किए जाने का उल्लेख आवेदन में किया गया है। आगे उच्च न्यायालय बिलासपुर में भी मामला पहुंचने और वहां से संबंधित आदेश के संबंध में निर्णय होने की बात कही गई है।
फिर कैसे जारी हुई 19 हजार एमटी की अनुमति?
आवेदन में सबसे बड़ा सवाल यह उठाया गया है कि न्यायालयीन प्रक्रिया में भूमि के औद्योगिक व्यपवर्तन से जुड़े आदेश निरस्त होने के बाद भी खनिज विभाग जांजगीर द्वारा 17 दिसंबर 2025 को 19 हजार एमटी कोयला भंडारण की अनुमति कैसे जारी कर दी गई?
आवेदकों ने आरोप लगाया है कि वर्तमान में उक्त अनुमति के आधार पर कोयला भंडारण किया जा रहा है, जबकि उनके अनुसार भूमि से संबंधित पूर्व आदेश न्यायालयीन प्रक्रिया में निरस्त हो चुके हैं। उन्होंने इसे नियम विरुद्ध बताते हुए संबंधित अनुमति निरस्त करने की मांग की है।
