रायपुर। छत्तीसगढ़ अब नक्सलवाद, भय और पिछड़ेपन के अतीत को पीछे छोड़कर शांति, विकास और असीम संभावनाओं के नए युग में कदम रख चुका है। रायपुर स्थित अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) के तीसरे दीक्षांत समारोह को संबोधित करते हुए उपराष्ट्रपति ने राज्य के इस सकारात्मक बदलाव को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि जो इलाके कभी हिंसा और असुरक्षा के लिए जाने जाते थे, वहां आज सड़कें, स्कूल, अस्पताल, डिजिटल कनेक्टिविटी और बड़े पैमाने पर निवेश पहुंच रहा है। यह बदलाव साबित करता है कि राज्य में अब बंदूक के खौफ पर जनविश्वास और प्रगति की जीत हो रही है।
उपराष्ट्रपति ने एम्स रायपुर को राज्य में स्वास्थ्य सेवाओं के ऐतिहासिक कायाकल्प का सशक्त स्तंभ बताया। उन्होंने कहा कि उन्नत चिकित्सा पद्धतियों, गहन चिकित्सकीय अनुसंधान और अंग प्रत्यारोपण के क्षेत्र में संस्थान ने बेहद उल्लेखनीय काम किया है। राज्य का पहला ‘स्वैप किडनी ट्रांसप्लांट’ सफलतापूर्वक पूरा करना इस बात का प्रमाण है कि मध्य भारत के मरीजों को अब उच्चस्तरीय इलाज के लिए महानगरों का रुख नहीं करना पड़ेगा।
समारोह में विभिन्न संकायों के होनहार छात्र-छात्राओं को उनकी उत्कृष्ट शैक्षणिक उपलब्धियों के लिए स्वर्ण पदक और उपाधियों से नवाजा गया। इस अवसर पर स्नातक (यूजी), स्नातकोत्तर (पीजी), सुपर-स्पेशियलिटी, डॉक्टरेट और संबद्ध स्वास्थ्य विज्ञान पाठ्यक्रमों के कुल 689 विद्यार्थियों को डिग्रियां प्रदान की गईं। उल्लेखनीय है कि डिग्री पाने वालों में 376 छात्राएं और 313 छात्र शामिल रहे, जो उच्च चिकित्सा शिक्षा में बेटियों की बढ़ती भागीदारी को भी दर्शाता है।
कार्यक्रम के दौरान युवा डॉक्टरों और शोधार्थियों को ‘से नो टू ड्रग्स’ की सामूहिक शपथ दिलाई गई। इसके तहत सभी नवदीक्षित चिकित्सकों ने स्वयं नशे से दूर रहने के साथ-साथ समाज को नशीले पदार्थों के दुष्प्रभावों से बचाने और व्यापक जनजागरूकता फैलाने का संकल्प लिया।
इस भव्य गरिमामय आयोजन के दौरान मंच पर छत्तीसगढ़ के राज्यपाल रमेन डेका, केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण राज्य मंत्री अनुप्रिया पटेल, राज्य के स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल और रायपुर के सांसद बृजमोहन अग्रवाल मौजूद रहे। वहीं, संस्थान की ओर से एम्स रायपुर के अध्यक्ष प्रो. (डॉ.) संजीव हांडा और कार्यकारी निदेशक सेवानिवृत्त लेफ्टिनेंट जनरल अशोक जिंदल भी उपस्थित थे।
