@संजय यादव
जांजगीर-चांपा। जिले की सियासत में इन दिनों भाजपा और कांग्रेस के बीच आरोप-प्रत्यारोप के साथ-साथ अंदरूनी राजनीतिक समीकरण भी चर्चा का विषय बन गया हैं। भाजपा जिला अध्यक्ष अंबेश जांगड़े पर विधायक व्यास कश्यप द्वारा एल्डरमैन नियुक्तियों में कथित लेनदेन और जिला अस्पताल से सरकारी खर्च पर डीजल लिए जाने जैसे गंभीर आरोप लगाए जाने के बाद भाजपा संगठन पूरी तरह अपने जिला अध्यक्ष के बचाव में उतरता दिखाई दे रहा हैं। पार्टी के पदाधिकारी और कार्यकर्ता एक मंच पर नजर आए और प्रेसवार्ता के जरिए जिला अध्यक्ष का पक्ष मजबूती से रखा।
वहीं दूसरी तरफ सबसे बड़ा सवाल कांग्रेस के भीतर की स्थिति को लेकर उठ रहा है। जांजगीर चाम्पा के विधायक व्यास कश्यप के आरोपों के समर्थन में अब तक कांग्रेस संगठन या किसी बड़े नेता की खुली प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। ऐसे में राजनीतिक गलियारों में चर्चा तेज है कि क्या विधायक अपने ही संगठन में अलग-थलग पड़ते जा रहे हैं?
व्यास कश्यप लगातार बेबाक अंदाज में सत्ता पक्ष और भाजपा नेताओं पर सवाल उठाते रहे हैं। वे सार्वजनिक मंचों और मिडिया के सामने सीधे तौर पर आरोप लगाने से पीछे नहीं हटते। यही मुखर अंदाज अब उनके लिए राजनीतिक चुनौती बनता नजर आ रहा है।
भाजपा एकजुट, कांग्रेस में खामोशी क्यों…
भाजपा जिला अध्यक्ष पर आरोप लगने के बाद पार्टी नेताओं का एकजुट होकर सामने आना जहां संगठन की मजबूती का संदेश दे रहा है, वहीं कांग्रेस की चुप्पी कई सवाल खड़े कर रही है। राजनीतिक जानकारों के बीच यह चर्चा भी है कि कहीं विधायक व्यास कश्यप और कांग्रेस के स्थानीय संगठन के बीच दूरी तो नहीं बढ़ रही?
सूत्रों के हवाले से यह भी चर्चा है कि कांग्रेस के एक बड़े नेता द्वारा विधायक की राजनीतिक गतिविधियों और बयानों पर नजर रखे जाने की बात कही जा रही है। ऐसे में यह कहना जल्दबाजी होगी कि कांग्रेस के भीतर किसी तरह का राजनीतिक षड्यंत्र चल रहा है।
विधायक का बढ़ता राजनीतिक कद कहीं किसी को खटक तो नहीं रहा?
व्यास कश्यप के लगातार मुखर रवैये और मुद्दों को आक्रामक तरीके से उठाने से उनकी राजनीतिक सक्रियता चर्चा में है। समर्थकों का मानना है कि जनता के बीच उनका यह अंदाज पसंद किया जा रहा है, जबकि विरोधियों के लिए यही शैली राजनीतिक परेशानी का कारण बन सकती है।
अब सवाल सिर्फ भाजपा जिला अध्यक्ष पर लगाए गए आरोपों तक सीमित नहीं है। असली सवाल यह है कि क्या कांग्रेस अपने विधायक के साथ मजबूती से खड़ी होगी या व्यास कश्यप को अपने ही संगठन के भीतर राजनीतिक लड़ाई अकेले लड़नी पड़ेगी?
आने वाले दिनों में कांग्रेस संगठन और उसके बड़े नेताओं की भूमिका इस पूरे राजनीतिक विवाद की दिशा तय करेगी। फिलहाल तस्वीर साफ है—भाजपा अपने जिला अध्यक्ष के बचाव में एकजुट दिखाई दे रही है, जबकि कांग्रेस की ओर से विधायक व्यास कश्यप के समर्थन में खामोशी ने कई राजनीतिक सवाल खड़े कर दिए हैं।
