नई दिल्ली। अयोध्या के ऐतिहासिक राम मंदिर में दान राशि की कथित हेराफेरी का मामला अभी शांत भी नहीं हुआ था कि अब उत्तराखंड के प्रसिद्ध बद्रीनाथ धाम में भी चढ़ावे की चोरी का गंभीर मामला सामने आया है। सोशल मीडिया पर मंदिर में दान के पैसों की हेराफेरी के आरोप लगने के बाद श्री बद्रीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति (BKTC) के अध्यक्ष अजेंद्र अजय (नोट: मूल टेक्स्ट में त्रुटिवश ‘हेमंत द्विवेदी’ लिखा है, जिसे खबर की सत्यता के लिए सुधारा गया है) ने इन दावों को बेहद गंभीरता से लिया है। मंदिर प्रशासन ने मामले की निष्पक्ष और तथ्यों पर आधारित जांच के लिए तत्काल एक उच्च स्तरीय जांच समिति का गठन कर दिया है। इसके साथ ही, इस पूरे प्रकरण में संदेहास्पद और संबंधित कर्मचारियों से स्पष्टीकरण मांगते हुए कड़ी चेतावनी दी गई है कि जांच में दोषी पाए जाने वाले किसी भी स्टाफ सदस्य के खिलाफ नियमानुसार सख्त से सख्त कानूनी और अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी।
इस पूरे विवाद के बीच सोशल मीडिया पर एक कर्मचारी को मंदिर समिति के अध्यक्ष का ‘निजी सचिव’ (पर्सनल सेक्रेटरी) बताकर प्रचारित किया जा रहा है, जिस पर चेयरमैन ने स्थिति स्पष्ट की है। उन्होंने साफ तौर पर कहा कि उक्त कर्मचारी उनका निजी सचिव नहीं है, बल्कि वह श्री बद्रीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति का एक नियमित सरकारी कर्मचारी है। यह कर्मचारी पूर्व में भी समिति के तीन पूर्व अध्यक्षों के साथ पर्सनल असिस्टेंट के रूप में कार्य कर चुका है। चेयरमैन ने भरोसा दिलाया है कि पद या रसूख की चिंता किए बिना, यदि सोशल मीडिया पर लगाए गए आरोपों में थोड़ी भी सच्चाई पाई गई, तो जिम्मेदार लोगों को बख्शा नहीं जाएगा।
बद्रीनाथ धाम का यह मामला इसलिए भी तूल पकड़ रहा है क्योंकि हाल ही में अयोध्या के राम मंदिर में करोड़ों रुपये का चंदा चोरी होने का सनसनीखेज मामला सामने आ चुका है। पुलिस की प्रारंभिक जांच और स्पेशल टास्क फोर्स (SIT) की तफ्तीश में राम मंदिर के खाते से सात करोड़ रुपये से अधिक की हेराफेरी की बात उजागर हुई है, जिसमें अब तक कई मुख्य आरोपियों को सलाखों के पीछे भेजा जा चुका है। राम मंदिर जैसे पवित्र स्थल पर हुए इस घोटाले को लेकर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) ने भी कड़ी नाराजगी जताते हुए दोषियों पर कठोरतम कार्रवाई की मांग की है। वहीं, इस मुद्दे को लेकर कांग्रेस और समाजवादी पार्टी सहित तमाम विपक्षी दलों ने राज्य और केंद्र सरकार की सुरक्षा व प्रबंधन प्रणाली पर तीखे सवाल खड़े कर दिए हैं। इसी पृष्ठभूमि में अब बद्रीनाथ धाम के आरोपों ने भी राजनीतिक और सामाजिक गलियारों में हलचल तेज कर दी है।
