नई दिल्ली। देशभर में मानसून ने अपनी रफ्तार को दोगुना कर दिया है, जिसके चलते मौसम विभाग ने अगले 8 घंटों के भीतर 16 राज्यों में मूसलाधार बारिश और भीषण आंधी का ऑरेंज अलर्ट जारी किया है। इस दौरान 50 से 80 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से विनाशकारी हवाएं चलने और आकाशीय बिजली गिरने की आशंका जताई गई है। मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार, उत्तर-पश्चिम बंगाल की खाड़ी और उससे सटे तटीय इलाकों में एक बेहद मजबूत कम दबाव का क्षेत्र (लो प्रेशर एरिया) बन गया है। इसके प्रभाव से अगले पांच से छह दिनों तक देश के मध्य हिस्सों में मानसूनी गतिविधियां पूरी तरह सक्रिय रहेंगी, जिससे कई राज्यों में सामान्य जनजीवन प्रभावित होने की संभावना है। यदि आप भी इन दिनों कहीं यात्रा करने की योजना बना रहे हैं, तो सुरक्षा के लिहाज से वेदर अपडेट्स पर नजर जरूर रखें।
इस बदलते मौसमी चक्र का असर मैदानी इलाकों से लेकर मरुस्थलीय क्षेत्रों तक साफ देखा जा रहा है। देश के प्रमुख महानगरीय हिस्सों में सुबह से ही छिटपुट से लेकर भारी बारिश का दौर जारी है, जहाँ 70 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से हवाएं चलने के कारण पारे में गिरावट दर्ज की गई है। वहीं, इसके पड़ोसी मैदानी और सीमावर्ती जिलों में भी 60 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार वाली हवाओं के साथ भारी बारिश की चेतावनी दी गई है। अगर पश्चिमी छोर की बात करें, तो वहाँ के एक दर्जन से अधिक जिलों में गरज-चमक के साथ हल्की से मध्यम बारिश का पूर्वानुमान है। इस क्षेत्र में 40 से 60 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से धूलभरी आंधियां चलने की आशंका है, जो आने वाले चार से पांच दिनों में और भी उग्र रूप ले लेंगी, जिससे कुछ विशेष इलाकों में बाढ़ जैसे हालात पैदा हो सकते हैं।
मैदानी राज्यों के मुकाबले पहाड़ी और पूर्वी अंचलों में खतरा कहीं ज्यादा गंभीर नजर आ रहा है। ऊंचे पहाड़ी क्षेत्रों और पर्यटन स्थलों वाले जिलों में आज हल्की शुरुआत के बाद अगले कुछ दिनों के भीतर अत्यंत भारी बारिश का दौर शुरू होने वाला है। इस वजह से ऊंचे पर्वतीय रास्तों पर भूस्खलन (लैंडस्लाइड) और अचानक आने वाली बाढ़ (फ्लैश फ्लड) का खतरा चरम पर पहुंच गया है, जिससे स्थानीय प्रशासन को मुस्तैद रहने के निर्देश दिए गए हैं। दूसरी ओर, देश के पूर्वी हिस्सों और पठारी राज्यों में भी बादलों की गड़गड़ाहट और बिजली गिरने की घटनाओं के साथ तेज हवाओं का दौर जारी है। मौसम विभाग का अनुमान है कि 4 से 8 जुलाई के बीच बारिश की यह रफ्तार देश के अधिकांश हिस्सों को अपनी चपेट में ले लेगी, जिससे आने वाले दिन मौसम के लिहाज से बेहद संवेदनशील साबित होने वाले हैं।
