नई दिल्ली। हर महीने की शुरुआत अपने साथ कुछ नए नियम और बदलाव लेकर आती है, और साल के इस सातवें महीने यानी जुलाई की शुरुआत भी आम लोगों की जिंदगी में कई खट्टे-मीठे बदलाव लेकर आई है। आज 1 तारीख से आपकी जेब, रसोई और डेली लाइफ से जुड़े कई महत्वपूर्ण नियम पूरी तरह बदल गए हैं। इस महीने जहां एक तरफ कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर के दामों में भारी कटौती कर उपभोक्ताओं को बड़ी राहत दी गई है, वहीं दूसरी तरफ पासपोर्ट बनवाने से लेकर बिना टिकट रेल यात्रा करने वालों पर जेब का बोझ बढ़ने वाला है। इसके अलावा आधार अपडेट, बैंकिंग फ्रॉड से जुड़े नियम और ग्रामीण रोजगार से जुड़ी मनरेगा योजना में भी ऐतिहासिक बदलाव लागू हो गए हैं।
रसोई और व्यापार के मोर्चे पर इस महीने की सुबह एक बेहद राहतभरी खबर लेकर आई है। देश की प्रमुख तेल विपणन कंपनियों ने कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर के दामों में 180 रुपये से अधिक की बड़ी कटौती की है। इंडियन ऑयल द्वारा जारी नई दरों के मुताबिक, दिल्ली में 19 किलोग्राम वाले कमर्शियल सिलेंडर की कीमत अब 183.50 रुपये घटकर 2,930 रुपये रह गई है, जो पहले 3,113.50 रुपये थी। इसी तरह पटना में अब इसकी कीमत 3,227 रुपये, लखनऊ में घटकर 3,052.50 रुपये, कोलकाता में 3,081.50 रुपये और जयपुर में 2,957.50 रुपये तय की गई है। इस कटौती से होटल, रेस्टोरेंट और छोटे व्यापारियों को बड़ी आर्थिक राहत मिलने की उम्मीद है।
राहत का यह सिलसिला केवल रसोई गैस तक ही सीमित नहीं है, बल्कि आधार कार्ड धारकों के लिए भी एक अच्छी खबर आई है। भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण (UIDAI) ने आधार कार्ड में ई-मेल आईडी अपडेट कराने पर लगने वाले 75 रुपये के शुल्क को अगले छह महीनों के लिए पूरी तरह माफ कर दिया है। आज से शुरू हुई यह मुफ्त सुविधा केवल यूआईडीएआई के आधिकारिक मोबाइल ऐप के माध्यम से ही प्राप्त की जा सकेगी। सरकार का मानना है कि इस कदम से अधिक से अधिक लोग अपने आधार रिकॉर्ड में ई-मेल आईडी लिंक करवा सकेंगे, जिससे डिजिटल सेवाओं की सुरक्षा और पहुंच दोनों आसान हो जाएगी।
एक तरफ जहां कुछ मोर्चों पर राहत मिली है, वहीं नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ केंद्र सरकार और रेलवे ने सख्ती बढ़ा दी है। अब बिना टिकट ट्रेन में सफर करने पर लगने वाले न्यूनतम जुर्माने को सीधे दोगुना करते हुए 250 रुपये से बढ़ाकर 500 रुपये कर दिया गया है। इतना ही नहीं, यदि कोई यात्री किसी दूसरे व्यक्ति के नाम पर बुक किए गए टिकट पर यात्रा करते हुए पकड़ा जाता है, तो उसका टिकट तुरंत जब्त कर लिया जाएगा, और उससे यात्रा का पूरा किराया व 500 रुपये का अतिरिक्त जुर्माना वसूला जाएगा। साथ ही, ट्रेनों में खतरनाक या प्रतिबंधित वस्तुएं ले जाने पर 10,000 रुपये तक का भारी जुर्माना और गंभीर मामलों में जेल की सजा का भी प्रावधान किया गया है।
इसी तरह विदेश जाने की इच्छा रखने वाले नागरिकों की जेब पर भी अब अधिक बोझ पड़ने वाला है, क्योंकि सरकार ने पासपोर्ट नियम 1980 में संशोधन कर फीस बढ़ा दी है। अब नया पासपोर्ट बनवाने या उसे री-इश्यू कराने के लिए 1,500 रुपये के बजाय 2,500 रुपये खर्च करने होंगे। वहीं, 36 पेज के तत्काल पासपोर्ट की फीस 3,500 रुपये से बढ़ाकर 5,000 रुपये कर दी गई है। यदि आप 60 पेज का जंबो पासपोर्ट बनवाना चाहते हैं, तो सामान्य श्रेणी में 2,000 की जगह 3,500 रुपये और तत्काल श्रेणी के लिए 4,000 रुपये की जगह 6,000 रुपये का भुगतान करना होगा।
वित्तीय क्षेत्र और बैंकिंग सेवाओं में भी ग्राहकों के हितों की रक्षा के लिए भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने नए कड़े दिशा-निर्देश लागू किए हैं। इन नियमों का मुख्य उद्देश्य बैंकों द्वारा ग्राहकों को जबरन या गलत तरीके से बीमा, म्यूचुअल फंड या अन्य वित्तीय उत्पाद बेचना (मिस-सेलिंग) रोकना है। अगर किसी बैंक द्वारा ग्राहक को गलत जानकारी देकर कोई प्रोडक्ट बेचा जाता है, तो शिकायत साबित होने पर ग्राहक को पूरा मुआवजा और अपनी राशि वापस पाने का कानूनी अधिकार होगा। इसके साथ ही एसबीआई ने अपने फोनपे को-ब्रांडेड क्रेडिट कार्ड पर मिलने वाले रिवॉर्ड पॉइंट्स को कम कर दिया है, जबकि एचडीएफसी बैंक ने चुनिंदा क्रेडिट कार्ड्स पर एयरपोर्ट लाउंज एक्सेस के लिए न्यूनतम खर्च की नई शर्तें लागू कर दी हैं।
स्वास्थ्य के क्षेत्र में नागरिकों को नकली और घटिया दवाओं से बचाने के लिए एक बड़ा सुरक्षा कवच तैयार किया गया है। अब सभी प्रकार के टीकों (वैक्सीन), एंटीमाइक्रोबियल्स और कैंसर रोधी दवाओं की प्राथमिक पैकेजिंग पर बारकोड या क्यूआर कोड (QR Code) छापना अनिवार्य कर दिया गया है। इससे पहले यह व्यवस्था केवल देश के चुनिंदा टॉप-300 फार्मास्युटिकल ब्रांडों पर ही लागू थी, लेकिन अब इसका दायरा बढ़ा दिया गया है ताकि आम जनता और स्वास्थ्य विभाग आसानी से दवाओं की असलियत और उनकी मैन्युफैक्चरिंग डिटेल्स को ट्रैक कर सकें।
इन सभी बदलावों के बीच देश के ग्रामीण परिदृश्य से सबसे ऐतिहासिक खबर सामने आई है। दो दशक से चली आ रही ‘मनरेगा’ (महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम) योजना को पूरी तरह समाप्त कर दिया गया है। इसके स्थान पर अब देश भर में ‘विकसित भारत- रोजगार और आजीविका के लिए गारंटी मिशन’ (वीबी-जी राम जी) अधिनियम लागू हो गया है। इस नए ढांचे के तहत ग्रामीण परिवारों को अब साल में 100 दिनों के बजाय 125 दिनों के वैधानिक मजदूरी वाले रोजगार की गारंटी मिलेगी। पारदर्शिता बढ़ाने के लिए पुराने जॉब कार्ड्स की जगह ‘स्मार्ट जॉब कार्ड’ दिए जाएंगे, जिसमें चेहरा पहचानने (Face Recognition) की विशेष तकनीक होगी, हालांकि श्रमिकों का भुगतान पहले की तरह सीधे उनके बैंक या डाकघर खातों में ही भेजा जाता रहेगा।
