कोंडागांव। छत्तीसगढ़ के कोंडागांव जिले में राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (NHM) के तहत सरकारी खरीद और निविदाओं में नियमों को ताक पर रखने का एक बड़ा मामला सामने आया है। नियमों की अनदेखी और गंभीर वित्तीय गड़बड़ी के आरोपों की पुष्टि होने के बाद प्रशासन ने कड़ा रुख अपनाते हुए तीन बड़े संविदा अधिकारियों को तत्काल प्रभाव से नौकरी से बर्खास्त कर दिया है। जिन अधिकारियों पर यह गाज गिरी है, उनमें जिला कार्यक्रम प्रबंधक (DPM) भावना महलवार, जिला लेखा प्रबंधक (DAM) शीतल कुमार ताम्रकार और जिला प्रशिक्षण समन्वयक दिलीप कुमार मधुकर शामिल हैं। राज्य कार्यालय द्वारा इन तीनों को पहले ‘कारण बताओ नोटिस’ जारी कर उनका पक्ष जानने की कोशिश की गई थी, लेकिन अधिकारियों द्वारा प्रस्तुत स्पष्टीकरण और जवाब को पूरी तरह से असंतोषजनक पाया गया। इसके बाद राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन की मानव संसाधन नीति-2018 की कंडिका 34.3 के तहत कड़ा कदम उठाते हुए इनकी संविदा सेवाएं समाप्त करने का अंतिम आदेश जारी कर दिया गया।
इस पूरे प्रशासनिक एक्शन की जड़ें राज्य विधानसभा से जुड़ी हैं, जहां इस वित्तीय अनियमितता का मुद्दा गूंजने के बाद हड़कंप मच गया था। मामले की गंभीरता को देखते हुए स्वास्थ्य सेवाएं संचालनालय के वित्त नियंत्रक की अगुवाई में एक चार सदस्यीय उच्च स्तरीय जांच समिति का गठन किया गया था। इस विशेष समिति ने कोंडागांव में विभिन्न स्वास्थ्य योजनाओं और सरकारी खरीद प्रक्रियाओं से जुड़े दस्तावेजों की गहराई से स्क्रूटनी की। जांच में सामने आया कि नियमों को दरकिनार करने के इस खेल में तत्कालीन मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (CMHO) समेत इन तीनों बर्खास्त अधिकारियों की सीधी भूमिका थी। इन सभी ने तय प्रक्रियाओं का पालन न करते हुए मनमाने ढंग से काम किया, जिसे जांच दल ने गंभीर वित्तीय अपराध माना।
विशेष रूप से, ग्रामीण स्वास्थ्य योजनाओं के तहत बांटी जाने वाली ‘श्रृंगार दान (नई पहल किट)’ की बड़े पैमाने पर की गई खरीदी और उसके वितरण में सबसे ज्यादा घालमेल पाया गया। अधिकारियों ने इस किट को खरीदने के लिए सरकारी टेंडर और नियमों का पूरी तरह पालन नहीं किया था। इसके अलावा, जब जांच टीम ने जमीनी रिकॉर्ड खंगाले तो भंडार शाखा (Store Branch) की स्टॉक पंजी के संधारण, जरूरी अभिलेखों के रख-रखाव और सामान के भौतिक सत्यापन (Physical Verification) में भी भारी लापरवाही और विसंगतियां पकड़ी गईं। विधानसभा में उठे मामले के बाद हुई इस त्वरित और सख्त कार्रवाई ने स्वास्थ्य विभाग के भीतर हड़कंप मचा दिया है और यह साफ संदेश दिया है कि सरकारी फंड के दुरुपयोग को किसी भी स्तर पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
