बेमेतरा। छत्तीसगढ़ के बेमेतरा में अंतरराष्ट्रीय योग दिवस का जिला स्तरीय समारोह उस समय सियासी अखाड़े में तब्दील हो गया, जब प्रोटोकॉल के उल्लंघन से नाराज साजा विधायक ईश्वर साहू अचानक मंच छोड़कर नीचे उतर गए। मुख्य कार्यक्रम स्थल पर लगी प्रचार सामग्रियों और बैनर-पोस्टरों से अपनी तस्वीर नदारद पाकर विधायक का पारा चढ़ गया। सत्ताधारी दल के विधायक के इस कड़े रुख से पंडाल में मौजूद प्रशासनिक अधिकारियों के हाथ-पांव फूल गए और आनन-फानन में उन्हें मनाने की कवायद शुरू कर दी गई।
दरअसल, योग दिवस के इस गरिमामयी आयोजन में राज्यसभा सांसद लक्ष्मी वर्मा और बेमेतरा विधायक दीपेश साहू सहित जिले के तमाम आला अधिकारी और जनप्रतिनिधि मंच पर आसीन थे। मंच की पृष्ठभूमि में लगे मुख्य पोस्टर पर कुछ चुनिंदा जनप्रतिनिधियों की तस्वीरें तो प्रमुखता से चमका दी गईं, लेकिन साजा विधायक ईश्वर साहू को उसमें जगह नहीं मिली। अपनी ही सरकार के कार्यक्रम में इस तरह की अनदेखी को विधायक ने अपने राजनीतिक और जन प्रतिनिधित्व के सम्मान से जोड़कर देखा और विरोध स्वरूप तुरंत मंच का परित्याग कर दिया।
विधायक के अचानक मंच से उतरते ही प्रशासनिक अमले में खलबली मच गई। कार्यक्रम की गरिमा को बचाने और सत्ता पक्ष के विधायक की नाराजगी दूर करने के लिए कलेक्टर और अन्य वरिष्ठ अधिकारियों ने मोर्चा संभाला। वीआईपी दीर्घा से दूर जा चुके विधायक ईश्वर साहू से अधिकारियों ने बंद कमरे और एकांत में लंबी चर्चा की। अधिकारियों द्वारा प्रोटोकॉल की इस बड़ी चूक के लिए खेद जताने और भविष्य में ऐसी पुनरावृत्ति न होने के आश्वासन के बाद आखिरकार विधायक का गुस्सा शांत हुआ, जिसके बाद वे दोबारा मंच पर लौटे और कार्यक्रम को आगे बढ़ाया गया।
इस पूरे घटनाक्रम ने बेमेतरा जिला प्रशासन की कार्यशैली और समन्वय पर गंभीर सवालिया निशान खड़े कर दिए हैं। राजनीतिक गलियारों में इस बात को लेकर तीखी चर्चा है कि योग दिवस जैसे बड़े और पूर्व-नियोजित आयोजनों में भी अधिकारी प्रोटोकॉल के नियमों को लेकर इतने लापरवाह कैसे हो सकते हैं। यह मामला सिर्फ एक फोटो का नहीं, बल्कि जनप्रतिनिधियों के प्रोटोकॉल और प्रशासनिक दूरदर्शिता की कमी का एक बड़ा उदाहरण बनकर सामने आया है।
