हैदराबाद। तेलंगाना की राजनीति और अपराध जगत के गठजोड़ को उजागर करने वाले एक बेहद सनसनीखेज मामले में कांग्रेस पार्टी ने अपने दो वरिष्ठ नेताओं को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। तेलंगाना कांग्रेस की अनुशासन समिति के अध्यक्ष मल्लू रवि ने शुक्रवार को वरिष्ठ नेता महबूब आलम खान और उनके बेटे मुजाहिद आलम खान पर यह कार्रवाई की। इन दोनों नेताओं पर वक्फ बोर्ड के पैनल वकील और वरिष्ठ अधिवक्ता खाजा मोइजुद्दीन की हत्या की खौफनाक साजिश रचने का गंभीर आरोप है। हैदराबाद पुलिस की तफ्तीश में यह साफ हो चुका है कि जिसे शुरुआत में एक साधारण सड़क हादसा समझा जा रहा था, वह दरअसल एक सोची-समझी और भाड़े के हत्यारों (सुपारी किलिंग) के जरिए अंजाम दी गई वारदात थी।
इस पूरी खूनी साजिश की पटकथा 23 मई की सुबह लिखी गई, जब रोजाना की तरह करीब पौने छह बजे अधिवक्ता खाजा मोइजुद्दीन तैरने के लिए अपने घर से निकले थे। इसी दौरान घात लगाए बैठी बिना नंबर प्लेट की एक तेज रफ्तार स्कॉर्पियो ने उन्हें जोरदार टक्कर मारी और मौके से फरार हो गई। गंभीर रूप से घायल मोइजुद्दीन ने अस्पताल में इलाज के दौरान दम तोड़ दिया। पुलिस कमिश्नर वीसी सज्जनार के मुताबिक, नामपल्ली पुलिस ने जब इस मामले की गहराई से जांच शुरू की, तो परतें खुलती चली गईं और राजनीतिक रसूख रखने वाले बाप-बेटे इस पूरी साजिश के मास्टरमाइंड बनकर सामने आए।
जांच में यह बात सामने आई है कि महबूब आलम खान के परिवार और दिवंगत वकील खाजा मोइजुद्दीन के बीच पिछले 10 सालों से मलकपेट और लकड़ी का पुल इलाके की बेशकीमती वक्फ संपत्तियों के नियंत्रण, प्रशासन और वित्तीय प्रबंधन को लेकर गंभीर विवाद चल रहा था। अदालतों और वक्फ ट्रिब्यूनल में चल रहे कई दीवानी और आपराधिक मामलों में खाजा मोइजुद्दीन की मजबूत कानूनी पैरवी के कारण महबूब आलम खान को लगातार कानूनी शिकस्त और सार्वजनिक अपमान का सामना करना पड़ रहा था। इसी हताशा और रंजिश में आकर मुजाहिद आलम खान और उसके पिता ने मोइजुद्दीन को हमेशा के लिए रास्ते से हटाने के लिए 15 लाख रुपये की सुपारी दे डाली।
यह हत्या कोई जल्दबाजी में उठाया गया कदम नहीं थी, बल्कि साल 2026 की शुरुआत से ही इसकी रेकी की जा रही थी। जनवरी महीने से ही किराए के गुर्गों को नामपल्ली में वकील के घर के आसपास तैनात कर दिया गया था, जो उनकी पल-पल की दिनचर्या पर नजर रख रहे थे। मुजाहिद आलम खान ने पहचान छिपाने के मकसद से अपने सहयोगी हसन अली के जरिए दो लाख रुपये में एक पुरानी गाड़ी खरीदी। इसके बाद, अपनी संलिप्तता छुपाने के लिए मुजाहिद ने सीधे शूटरों से बात न करके बिचौलियों के जरिए हरियाणा के पानीपत के रहने वाले किशन उर्फ पप्पू से संपर्क साधा, जिसने आगे विनय, अभिजीत, विक्रम और मणिदीप नाम के अपराधियों को वारदात को अंजाम देने का जिम्मा सौंपा।
पुलिस को इस अंधे कत्ल के मामले में बड़ी कामयाबी 27 मई को मिली, जब मुख्य शूटर किशन उर्फ पप्पू को हरियाणा के पानीपत से दबोचा गया। पप्पू की निशानदेही और कबूलनामे के बाद पुलिस की विशेष टीमों ने 29 मई को हैदराबाद के जुबली हिल्स स्थित आलीशान आवास से मुजाहिद आलम खान और शहर के अन्य ठिकानों से महबूब आलम खान सहित कुल सात आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने आरोपियों के पास से वारदात में इस्तेमाल की गई गाड़ी, सुपारी की रकम के रूप में रखे 10 लाख 10 हजार रुपये नकद और साजिश में इस्तेमाल किए गए कई मोबाइल फोन बरामद किए हैं।
फिलहाल, सहायक पुलिस आयुक्त पी. प्रवीण कुमार के नेतृत्व में नामपल्ली पुलिस की टीम ने गिरफ्तार सभी सातों आरोपियों पर भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 103(1) (हत्या) और 61(2)(ए) (आपराधिक साजिश) के तहत मामला दर्ज कर उन्हें न्यायिक हिरासत में भेज दिया है। पुलिस कमिश्नर का कहना है कि इन्हें रिमांड पर लेकर पूछताछ की जाएगी क्योंकि इस खूनी खेल में अभी भी कम से कम तीन अन्य लोग फरार हैं। इस रोंगटे खड़े कर देने वाले हत्याकांड ने जहां राजनीतिक गलियारों में हड़कंप मचा दिया है, वहीं पुलिस अब इस पूरे आपराधिक और राजनीतिक नेटवर्क को पूरी तरह से नेस्तनाबूद करने में जुटी है।
