फटाफट डेस्क। रात के आसमान में चमकने वाले चांद पर इंसानों का अपना आशियाना होने का सपना अब सिर्फ साइंस फिक्शन फिल्मों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि बहुत जल्द हकीकत में बदलने जा रहा है। अंतरिक्ष अनुसंधान की दुनिया में एक युगांतकारी कदम उठाते हुए अमेरिकी स्पेस एजेंसी नासा (NASA) ने चंद्रमा पर इंसानों की पहली स्थायी बस्ती यानी ‘मून बेस’ बनाने का आधिकारिक ऐलान कर दिया है। इस महात्वाकांक्षी परियोजना के लिए करीब 8,300 करोड़ रुपये (1 बिलियन डॉलर) का भारी-भरकम बजट आवंटित किया गया है, जिसके तहत इसी साल यानी 2026 से ही ताबड़तोड़ मिशन भेजने की तैयारी पूरी हो चुकी है। नासा के एडमिनिस्ट्रेटर जेरेड इसाकमैन के मुताबिक, यह बेहद चुनौतीपूर्ण और खतरनाक माहौल में इंसानों के रहने और काम करने का हुनर सीखने का एक ऐतिहासिक अवसर है।
चांद के रहस्यों को खंगालने वाले आर्टेमिस II मिशन की ऐतिहासिक कामयाबी के बाद तैयार किए गए इस रोडमैप के तहत, साल 2026 में तीन बड़े कार्गो मिशन चंद्रमा के साउथ पोल (दक्षिणी ध्रुव) के लिए रवाना किए जाएंगे। इंसानों के कदम रखने से पहले भेजे जा रहे ये तीनों मिशन पूरी तरह से ‘अनक्रूड’ यानी बिना इंसानों वाले होंगे, जिनका मकसद वहां के अज्ञात खतरों का पता लगाना और इंसानी बस्ती के लिए जमीन तैयार करना है। इस अभियान के पहले चरण ‘मून बेस I’ के तहत जेफ बेजोस की प्रसिद्ध अंतरिक्ष कंपनी ‘ब्लू ओरिजिन’ के लैंडर के जरिए दो विशेष वैज्ञानिक उपकरण चांद पर भेजे जाएंगे, जो यह जांच करेंगे कि रॉकेट के धुएं से चांद की सतह पर क्या प्रभाव पड़ता है। इसके तुरंत बाद ‘मून बेस II’ मिशन एक छोटे रोवर और करीब 500 किलोग्राम वजनी साजो-सामान के साथ उड़ान भरेगा, ताकि यह परीक्षण किया जा सके कि चांद की उबड़-खाबड़ जमीन पर भारी वजन को कैसे ले जाया जा सकता है। वहीं, श्रृंखला का तीसरा मिशन ‘मून बेस III’ यूरोपीय और दक्षिण कोरियाई स्पेस एजेंसियों के उपकरणों की मदद से चांद पर दिखने वाले अजीबोगरीब और चमकदार धब्बों पर गहन शोध करेगा।
इस महापरियोजना का सबसे रोमांचक पहलू चांद की सतह पर अत्याधुनिक वाहनों की आवाजाही होगी। नासा ने चंद्रमा की सड़कों पर दौड़ने वाली विशेष गाड़ियां यानी ‘लूनर रोवर्स’ बनाने के लिए दो दिग्गज अमेरिकी कंपनियों को चुना है, जिन्हें 18 महीने के भीतर डिजाइन तैयार कर अंतरिक्ष यात्रियों के साथ इसकी टेस्टिंग पूरी करनी होगी। इसमें से पहली कंपनी ‘एस्ट्रोलैब’ को 219 मिलियन डॉलर का कॉन्ट्रैक्ट मिला है, जो एक 900 किलोग्राम वजनी रोवर तैयार करेगी जो अंतरिक्ष यात्रियों को 9.5 किलोमीटर प्रति घंटे से अधिक की रफ्तार से ले जा सकेगा। दूसरी कंपनी ‘लूनर आउटपोस्ट’ को 220 मिलियन डॉलर का काम सौंपा गया है, जो अधिक हल्का और 14 किलोमीटर प्रति घंटे से ज्यादा की रफ्तार वाला रोवर बनाएगी; इस रोवर की खासियत यह होगी कि इसे चांद पर मौजूद एस्ट्रोनॉट्स के साथ-साथ पृथ्वी से रिमोट द्वारा या ऑटोमैटिक मोड पर भी चलाया जा सकेगा। इन दोनों भारी-भरकम रोवर्स को चांद की सतह पर सुरक्षित उतारने का जिम्मा भी जेफ बेजोस की ब्लू ओरिजिन को मिला है, जिसके लिए उन्हें अलग से 188 मिलियन डॉलर दिए गए हैं। ये रोवर्स साल 2028 तक पूरी तरह से चांद पर तैनात हो जाएंगे।
चांद के सफर को और अधिक सुगम और तकनीकी रूप से उन्नत बनाने के लिए साल 2028 में चार छोटे ‘हॉपिंग ड्रोन’ (कूदने वाले ड्रोन) भी वहां भेजे जाएंगे। इन ड्रोनों को ‘फायरफ्लाई एयरोस्पेस’ कंपनी के स्पेसक्राफ्ट की मदद से चांद पर पहुंचाया जाएगा, जो उन दुर्गम खाइयों और संकरे स्थानों की तस्वीरें और डेटा जुटाएंगे जहां भारी रोवर्स का पहुंचना नामुमकिन है। नासा प्रमुख जेरेड इसाकमैन का मानना है कि ‘मून बेस’ अंतरिक्ष में मानव सभ्यता की पहली स्थायी चौकी बनेगी। इसका उद्देश्य न केवल चांद पर विज्ञान को बढ़ावा देना है, बल्कि भविष्य में मंगल ग्रह जैसे सुदूर अंतरिक्ष के मानव मिशनों के लिए एक मजबूत लॉन्चपैड और बेस तैयार करना भी है।
