चेन्नई। तमिलनाडु की सियासत में जारी हलचल के बीच मुख्यमंत्री विजय ने शुक्रवार को एक बार फिर अपने मंत्रिमंडल का विस्तार कर दिया। इस नए विस्तार के साथ ही दो प्रमुख घटक दल, वीसीके (VCK) और आईयूएमएल (IUML), औपचारिक रूप से सरकार में शामिल हो गए हैं। दिलचस्प बात यह है कि ये दोनों ही दल पहले विजय सरकार को बाहर से समर्थन देने का एलान कर चुके थे, लेकिन अब वे सीधे सत्ता का हिस्सा बन चुके हैं। इससे पहले गुरुवार को हुए बड़े मंत्रिमंडल विस्तार में इन दोनों दलों के शामिल न हो पाने को लेकर कई तरह के कयास लगाए जा रहे थे।
दरअसल, मुख्यमंत्री विजय ने पहले ही इन दोनों पार्टियों से सरकार में शामिल होने की अपील की थी, परंतु ऐन वक्त पर मंत्रियों के नामों का चयन करने में हुई देरी के कारण ये दल गुरुवार को शपथ नहीं ले सके थे। नतीजतन, गुरुवार को केवल कांग्रेस के दो और टीवीके (TVK) के 21 विधायकों सहित कुल 23 मंत्रियों ने ही पद की शपथ ली थी, जिसके ठीक अगले दिन आज इस कसर को भी पूरा कर लिया गया।
मंत्रिमंडल के इस नए स्वरूप में जहां घटक दलों को जगह मिली है, वहीं एआईएडीएमके (AIADMK) के बागी विधायकों को तगड़ा झटका लगा है। विश्वास मत के दौरान व्हिप का उल्लंघन कर टीवीके सरकार का समर्थन करने वाले एआईएडीएमके के 25 बागी विधायकों को इस कैबिनेट विस्तार में जगह नहीं दी गई है। राजनीतिक गलियारों में चर्चा थी कि सीवी षणमुगम, एसपी वेलूमुणी और विजय भास्कर जैसे दिग्गज नेताओं ने पार्टी से बगावत ही इसी शर्त पर की थी कि उनके गुट को सरकार में मंत्री पद मिलेगा।
हालांकि, मुख्यमंत्री विजय ने वामपंथी दलों और अन्य सहयोगी पार्टियों के भारी दबाव के आगे झुकते हुए इन बागी विधायकों से दूरी बनाए रखना ही मुनासिब समझा। इसके पीछे एक बड़ा कारण इन विधायकों पर मंडरा रहा दलबदल विरोधी कानून का खतरा भी है, क्योंकि एआईएडीएमके ने सरकार के विरोध में वोट करने का व्हिप जारी किया था और इसके खिलाफ जाने की वजह से इन 25 विधायकों की सदस्यता कभी भी रद्द हो सकती है। कानूनी पचड़ों से बचने के लिए ही मुख्यमंत्री ने फिलहाल इन्हें सरकार से दूर रखा है।
इस फैसले के बाद अब एआईएडीएमके के बागी धड़े में फूट पड़ती दिखाई दे रही है और उनकी स्थिति बेहद कमजोर हो गई है। मंत्रिमंडल में जगह न मिलने से नाराज होकर 25 में से 9 विधायकों ने बगावत की अगुवाई करने वाले सीनियर नेता सीवी षणमुगम से किनारा कर लिया है। इस बदलते समीकरण को देखते हुए मूल एआईएडीएमके खेमे को उम्मीद है कि आने वाले दिनों में भटके हुए अधिकांश विधायक वापस अपनी पुरानी पार्टी में लौट आएंगे।
दूसरी ओर, बगावत का झंडा बुलंद करने वाले सीनियर नेताओं के तेवर भी अब पूरी तरह ठंडे पड़ चुके हैं। जो नेता कुछ समय पहले तक एआईएडीएमके महासचिव एडप्पाडी पलनीस्वामी के सीधे इस्तीफे की मांग कर रहे थे, वे अब नरम रुख अपनाते हुए हार की समीक्षा के लिए पार्टी की सर्वोच्च जनरल काउंसिल की बैठक बुलाने की मांग पर सिमट गए हैं।
