सूरजपुर। कहते हैं कि दुनिया में माता-पिता का साया बच्चे के लिए सबसे सुरक्षित ढाल होता है, लेकिन जब वही साया साथ छोड़ दे, तो व्यवस्था और समाज के सामने कई गंभीर सवाल खड़े हो जाते हैं। कुछ ऐसा ही दिल को झकझोर देने वाला मामला सूरजपुर जिले के रामानुजनगर थाना क्षेत्र से सामने आया है। यहाँ सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC) रामानुजनगर के परिसर में बने नवजात शिशु पालने में अज्ञात माता-पिता अपने महज तीन-चार दिन के मासूम बच्चे को छोड़कर गायब हो गए।
इस कड़कड़ाती धूप और मौसम के बीच, कपड़े में लिपटा वह मासूम इस बात से बिल्कुल अनजान था कि जिन हाथों ने उसे दुनिया में लाया, वही उसे लावारिस छोड़ गए हैं। इस घटना ने एक बार फिर समाज को यह सोचने पर मजबूर कर दिया है कि आखिर ऐसी क्या भीषण मजबूरी या सामाजिक डर रहा होगा, जिसने एक मां-बाप को अपने ही कलेजे के टुकड़े को इस तरह अजनबी पालने में छोड़ने पर विवश कर दिया।
अस्पताल परिसर के पालने में जब बच्चे के रोने की आवाज गूंजी, तो वहां मौजूद स्टाफ और मरीजों के पैर ठिठक गए। मामले की जानकारी तुरंत स्थानीय प्रशासन और बाल संरक्षण विभाग को दी गई। सूचना मिलते ही महिला एवं बाल विकास विभाग की जिला बाल संरक्षण टीम मुस्तैदी से मौके पर पहुंची। टीम ने तुरंत नवजात लड़के को अपने संरक्षण में लिया और उसकी नाजुक स्थिति को देखते हुए उसे जिला चिकित्सालय सूरजपुर में भर्ती कराया। राहत की बात यह है कि फिलहाल बच्चा डॉक्टरों की देखरेख में पूरी तरह सुरक्षित और स्वस्थ है।
प्रशासन अब इस बात की तफ्तीश में जुटा है कि इस बच्चे के जन्मदाता कौन हैं। अस्पताल के रिकॉर्ड और आसपास के इलाकों में नवजात के परिजनों की सरगर्मी से तलाश (पताशाजी) की जा रही है। अधिकारियों का कहना है कि यदि नियत समय के भीतर बच्चे के असली माता-पिता या परिजनों का पता नहीं चलता है, तो वैधानिक प्रक्रिया पूरी करने के बाद इस मासूम को ‘मातृछाया’ संस्था में सुरक्षित और स्नेहपूर्ण परिवेश में भेज दिया जाएगा, ताकि उसका भविष्य संवर सके।
