महासमुंद। छत्तीसगढ़ के महासमुंद जिले में कानून के रखवालों और रसूखदारों की मिलीभगत से अंजाम दिए गए एक सनसनीखेज एलपीजी घोटाले का पर्दाफाश हुआ है। पुलिस ने इस मामले में कड़ी कार्रवाई करते हुए पूर्व राज्यमंत्री के दामाद और एजेंसी संचालक पंकज चंद्राकर, जिला खाद्य अधिकारी अजय यादव और व्यापारी मनीष चौधरी को सलाखों के पीछे भेज दिया है। यह पूरा मामला ठाकुर पेट्रोकेमिकल्स द्वारा करीब 1.5 करोड़ रुपये की सरकारी संरक्षण में रखी गई गैस को अवैध तरीके से बाजार में खपाने से जुड़ा है। इस हाई-प्रोफाइल केस में रसूख का ऐसा आलम था कि जब्त किए गए गैस कैप्सूलों को सुरक्षित रखने के नाम पर आरोपियों ने उसे अपने ही प्लांट में खाली कर लिया और सबूत मिटाने की भी भरपूर कोशिश की।
घटना की जड़ें दिसंबर 2025 में टिकी हैं, जब सिंघोड़ा पुलिस ने बिना वैध दस्तावेजों के परिवहन की जा रही 90 मीट्रिक टन एलपीजी से लदी 6 गैस कैप्सूल गाड़ियां जब्त की थीं। सुरक्षा कारणों से इन धमाकाखेज वाहनों को थाने के बजाय सुरक्षित स्थान पर रखने का निर्णय लिया गया। यहीं से साजिश का खेल शुरू हुआ। कलेक्टर के निर्देश पर खाद्य विभाग ने इन ट्रकों को अभनपुर स्थित ठाकुर पेट्रोकेमिकल्स के सुपुर्द कर दिया। नियमों को ताक पर रखकर करीब 200 किलोमीटर के सफर के दौरान कहीं भी इन कैप्सूलों का वजन नहीं कराया गया। इस लापरवाही का फायदा उठाकर कंपनी के मालिकों और अधिकारियों ने मिलकर साजिश रची और करीब 8 दिनों के भीतर सभी कैप्सूलों को प्लांट के बुलेट टैंकों में खाली कर दिया। जब प्लांट के टैंक भर गए, तो चोरी की गई अतिरिक्त गैस को बिना बिल के कच्चे चालान पर दूसरी एजेंसियों को बेच दिया गया।
इस घोटाले की परतें तब खुलीं जब पुलिस और नेशनल एक्सपर्ट्स ने जांच शुरू की। विशेषज्ञों ने अपनी रिपोर्ट में स्पष्ट किया कि एक कैप्सूल से बिना किसी दुर्घटना के 20 टन गैस का कम होना नामुमकिन है, जिससे यह साफ हो गया कि गैस जानबूझकर निकाली गई थी। जांच में एक और चौंकाने वाला तथ्य सामने आया कि ठाकुर पेट्रोकेमिकल्स ने अप्रैल माह में जितनी गैस खरीदी थी, उससे तीन गुना ज्यादा की बिक्री दिखाई। दस्तावेजों के मुताबिक 47 टन गैस खरीदी गई, जबकि कागजों में 107 टन की बिक्री दर्ज थी। पकड़े जाने के डर से आरोपियों ने ऑफिस से अप्रैल महीने का वह कच्चा रजिस्टर भी गायब कर दिया, जिसमें अवैध लेन-देन का ब्योरा था।
पुलिस की इस कार्रवाई से जिले के रसूखदारों में हड़कंप मच गया है। गिरफ्तार आरोपी पंकज चंद्राकर पूर्व राज्यमंत्री पूनम चंद्राकर के भाई का दामाद है, जिसकी ‘गौरव गैस एजेंसी’ इस पूरे खेल में संदिग्ध पाई गई है। फिलहाल, ठाकुर पेट्रोकेमिकल के मालिक संतोष ठाकुर और सार्थक ठाकुर फरार हैं, जिनकी तलाश में पुलिस की टीमें छापेमारी कर रही हैं। एसपी प्रभात कुमार ने पुष्टि की है कि यह एक सोची-समझी साजिश थी जिसमें सरकारी तंत्र और निजी कारोबारियों ने मिलकर राजस्व को भारी चपत लगाई। पुलिस ने अब तक 7 एलपीजी टैंकर, 4 बुलेट टैंक और 100 गैस सिलेंडर सहित कई इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य जब्त किए हैं। फरार आरोपियों की गिरफ्तारी के बाद इस सिंडिकेट के कुछ और बड़े नामों के सामने आने की संभावना है।
