कवर्धा। छत्तीसगढ़ के कवर्धा में जिला प्रशासन और पुलिस ने मानवता को शर्मसार करने वाले एक बड़े रैकेट का भंडाफोड़ करते हुए विशेष रूप से संरक्षित बैगा जनजाति के 13 मासूम बच्चों को बंधुआ मजदूरी के नर्क से मुक्त कराया है।
बुधवार, 6 मई 2026 को पुलिस अधीक्षक धर्मेंद्र सिंह के नेतृत्व में शुरू हुआ यह ऑपरेशन गुरुवार तक चला, जिसमें चाइल्डलाइन और सामाजिक संस्था ‘एवीए’ की मदद से उन स्थानों पर छापेमारी की गई जहां 8 से 15 साल के बच्चों को पशुपालन और मवेशियों की देखरेख के नाम पर प्रताड़ित किया जा रहा था। जांच में यह भयावह सच सामने आया कि इन मासूमों को महज 1,000 से 2,000 रुपये के मामूली लालच में तस्करों ने उनके गरीब परिवारों से बेहतर भविष्य का झूठा वादा कर करीब 8 महीने पहले छीना था।

ऑपरेशन की शुरुआत एक पशुपालन फार्म से हुई, जहाँ से मिले सुरागों के आधार पर अन्य ठिकानों पर दबिश देकर कुल 13 बच्चों को बचाया गया। रेस्क्यू टीम के अनुसार, बच्चों को बेहद अमानवीय स्थितियों में रखा गया था, जहाँ उनसे प्रतिदिन 10 घंटे से अधिक कठिन श्रम कराया जाता था। पुलिस ने इस मामले में त्वरित कार्रवाई करते हुए रवि यादव, रामू यादव, बद्री यादव, कन्हैया यादव और रूपेश यादव सहित 10 आरोपियों को सलाखों के पीछे भेज दिया है, जबकि गिरोह के अन्य सदस्यों की तलाश में छापेमारी जारी है।
एसोसिएशन फॉर वालंटरी एक्शन के वरिष्ठ निदेशक मनीष शर्मा ने इस घटना पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए बच्चों के पूर्ण पुनर्वास और मुआवजे की मांग की है। फिलहाल, सभी बच्चों को सुरक्षित संरक्षण संस्थानों में भेजा गया है, जहाँ उनकी काउंसलिंग की जा रही है ताकि वे इस मानसिक आघात से उबर सकें। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि दोषियों के खिलाफ मानव तस्करी, बंधुआ मजदूरी और किशोर न्याय अधिनियम की सख्त धाराओं के तहत कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।
