जांजगीर चांपा। जिले में आयोजित जनसमस्या निवारण शिविर के पहले ही दिन सरकार की मंशा पर सवाल खड़े हो गए। प्रभारी मंत्री ओपी चौधरी जांजगीर तो पहुंचे, लेकिन जनता की समस्याएं सुनने शिविर स्थल तक जाना मुनासिब नहीं समझा। आरोप है कि मंत्री सीधे सर्किट हाउस के एसी कमरे में बैठे रहे, अधिकारियों के साथ बंद कमरे में चर्चा की और बिना जनता से संवाद किए वापस लौट गए।
इस पूरे घटनाक्रम के बाद राजनीतिक गलियारों में हलचल तेज हो गई। कांग्रेस ने इसे जनता के साथ खुला मजाक बताते हुए सरकार पर जोरदार हमला बोला। कांग्रेस नेताओं ने कहा कि जिन शिविरों को जनता की समस्याओं के त्वरित समाधान के लिए शुरू किया गया है, वही शिविर अब दिखावा बनकर रह गए हैं। अगर प्रभारी मंत्री को ही जनता की पीड़ा सुनने की फुर्सत नहीं, तो आम आदमी किससे उम्मीद करे?
कांग्रेस का आरोप है कि भाजपा सरकार कागजों और फाइलों में ही समस्याएं सुलझाने का ढोंग कर रही है, जबकि जमीनी हकीकत इससे कोसों दूर है। बेरोजगारी, बिजली, पानी, सड़क, शिक्षा और स्वास्थ्य जैसी बुनियादी समस्याओं से जूझ रही जनता शिविर स्थल पर घंटों इंतजार करती रही, लेकिन प्रभारी मंत्री वहां जाना सही नहीं समझा।
आपको बता दे कि मुख्यमंत्री निर्देशानुसार “सुशासन तिहार 2026” के अंतर्गत जिले में शहरी एवं ग्रामीण क्षेत्रों में आम जनता की समस्याओं के त्वरित समाधान हेतु 1 मई से 10 जून 2026 तक “जनसमस्या निवारण शिविर” आयोजित किए जा रहे हैं।
इसी क्रम में आज जनपद पंचायत नवागढ़ के ग्राम सरखों में शनिवार को जिले का पहला जनसमस्या निवारण शिविर का आयोजन किया गया। इस क्लस्टर में सरखों, करमंदी, तेन्दूभांठा, खोखसा, सिवनी, पाली, कन्हाईबंद, बोड़सरा, मरकाडीह, हाथीटिकरा, बनारी, खोखरा, पुटपुरा, पेण्ड्री (जां.), धाराशिव (खो.), मेहदा, सेवई, कुटरा एवं कुथुर ग्राम पंचायतें शामिल रहीं।
जनसमस्या शिविर में कांग्रेसी विधायक क्षेत्र की समस्याओं को लेकर पहुंचे…
जिले में जनसमस्या निवारण शिविर को लेकर जहां सत्ता पक्ष सवालों के घेरे में है, वहीं जांजगीर चांपा के कांग्रेस विधायक व्यास कश्यप ने जमीन पर उतरकर जनता की आवाज बुलंद की। विधायक व्यास कश्यप क्षेत्र की गंभीर समस्याओं को लेकर स्वयं शिविर स्थल सारखो पहुंचे और अधिकारियों से सीधा संवाद करते हुए लिखित रूप में समस्या पत्र सौंपा।
विधायक ने साफ शब्दों में कहा कि जनसमस्या निवारण शिविर तभी सफल माने जाएंगे, जब अंतिम पंक्ति में खड़े गरीब और जरूरतमंद व्यक्ति की समस्या का वास्तविक समाधान होगा। सिर्फ टेंट लगाकर, मंच सजाकर और फोटो खिंचवाकर शिविर करने से जनता को कोई राहत नहीं मिलने वाली। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार जनसमस्या शिविरों को समाधान का माध्यम नहीं, बल्कि प्रचार-प्रसार का जरिया बना रही है।
व्यास कश्यप ने कहा कि क्षेत्र में सड़क, पेयजल, बिजली, स्वास्थ्य, राशन और आवास जैसी बुनियादी समस्याएं लंबे समय से लंबित हैं, लेकिन अफसरशाही फाइलों में उलझकर बैठी है। इसी कारण वे खुद चलकर शिविर स्थल पहुंचे, ताकि अधिकारियों को मौके पर ही जनता की पीड़ा से अवगत कराया जा सके।
विधायक का इस तरह शिविर स्थल पहुंचकर आवेदन देना पूरे क्षेत्र में चर्चा का विषय बना हुआ है। समर्थकों का कहना है कि विधायक का यह कदम साबित करता है कि वे अपने क्षेत्र की समस्याओं को लेकर कितने गंभीर और प्रतिबद्ध हैं।
