धमतरी। जिले में प्रशासन द्वारा संचालित ‘सही दवा, शुद्ध आहार’ अभियान ने मिलावटखोरों और नियमों की अनदेखी करने वाले संचालकों की नींद उड़ा दी है। अभियान के तीसरे दिन खाद्य एवं औषधि प्रशासन की संयुक्त टीम ने शहर से लेकर ग्रामीण इलाकों तक सघन जांच की, जिसमें चौंकाने वाले खुलासे हुए। मगरलोड ब्लॉक स्थित डोमार भोजनालय में स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ का एक गंभीर मामला सामने आया, जहाँ फ्राई मछली को आकर्षक दिखाने के लिए प्रतिबंधित और अखाद्य ‘जलेबी रंग’ का इस्तेमाल किया जा रहा था। टीम ने तत्काल कार्रवाई करते हुए न केवल अखाद्य सामग्री को नष्ट करवाया, बल्कि संचालक को अंतिम चेतावनी देते हुए स्पष्ट किया कि दोबारा ऐसी गलती पाए जाने पर सीधे कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
यह कार्रवाई केवल भोजनालयों तक सीमित नहीं रही, बल्कि टीम ने दुग्ध उत्पादों और दवाओं की शुद्धता पर भी पैनी नजर रखी। अभियान के दौरान दूध और डेयरी उत्पादों से जुड़े 16 प्रतिष्ठानों का निरीक्षण किया गया, जहाँ साफ-सफाई और खाद्य पंजीयन प्रमाण पत्र को सार्वजनिक रूप से प्रदर्शित करने के कड़े निर्देश दिए गए। वहीं, औषधि प्रकोष्ठ की टीम ने धमतरी, भखारा, कुरुद और बगौद क्षेत्र के 11 रिटेल मेडिकल स्टोर्स पर दबिश दी। इस दौरान दवाओं के क्रय-विक्रय रिकॉर्ड, स्टॉक रजिस्टर और लाइसेंस शर्तों की बारीकी से पड़ताल की गई। नियमों में लापरवाही और अनियमितता बरतने पर दो मेडिकल स्टोर्स को कारण बताओ नोटिस जारी कर जवाब तलब किया गया है।
अभियान के दौरान स्ट्रीट फूड वेंडर्स पर भी प्रशासन का चाबुक चला। मेद्या और मगरलोड क्षेत्रों में 34 ठेलों और दुकानों की जांच की गई, जहाँ कई विक्रेता हानिकारक अखबारी कागज में खाद्य सामग्री परोसते पाए गए। टीम ने मौके पर ही अखबारों को नष्ट कर उन्हें डिस्पोजेबल पत्तलों या सुरक्षित विकल्पों का उपयोग करने की हिदायत दी। थोक दवा एजेंसियों पर भी निगरानी बढ़ा दी गई है, जहाँ सात बड़ी एजेंसियों के स्टॉक और बिलिंग की जांच के साथ-साथ एक संदिग्ध दवा का नमूना लेकर उसे परीक्षण के लिए प्रयोगशाला भेजा गया है। अभिहित अधिकारी सर्वेश कुमार यादव और उनकी टीम ने यह साफ संदेश दिया है कि जिले में खाद्य सुरक्षा और दवाओं की गुणवत्ता मानकों में किसी भी स्तर पर समझौता नहीं किया जाएगा।
