रायपुर। छत्तीसगढ़ में निजी स्कूलों के भविष्य और आरटीई (RTE) के तहत मिलने वाली प्रतिपूर्ति राशि को लेकर राज्य की शिक्षा व्यवस्था आज एक बड़े गतिरोध का सामना कर रही है। अपनी मांगों के समर्थन में छत्तीसगढ़ प्राइवेट स्कूल मैनेजमेंट एसोसिएशन ने आज प्रदेश के सभी निजी स्कूलों को बंद रखने का निर्णय लिया है।
इस आंदोलन की शुरुआत 17 अप्रैल को शिक्षकों और संचालकों द्वारा बांह पर काली पट्टी बांधकर किए गए प्रतीकात्मक विरोध के साथ हुई थी, जिसे अब पूर्ण बंद के रूप में आगे बढ़ाया जा रहा है। स्कूल संचालकों का स्पष्ट कहना है कि वर्ष 2011 के बाद से प्रतिपूर्ति राशि में कोई संशोधन नहीं किया गया है, जबकि इस दौरान महंगाई और स्कूलों के संचालन का खर्च कई गुना बढ़ चुका है।
एसोसिएशन का दावा है कि इस आर्थिक दबाव के चलते स्कूलों को चलाना बेहद मुश्किल हो गया है। कड़ा रुख अपनाते हुए एसोसिएशन ने अल्टीमेटम दिया है कि जब तक सरकार उनकी मांगों पर सकारात्मक रुख नहीं अपनाती, वे शिक्षा का अधिकार अधिनियम के तहत नए बच्चों को प्रवेश नहीं देंगे।
इस विवाद के बीच स्कूल शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव ने स्थिति को स्पष्ट करते हुए कहा है कि छत्तीसगढ़ सरकार अन्य राज्यों की तुलना में पहले से ही बेहतर प्रतिपूर्ति राशि का भुगतान कर रही है। मंत्री के इस बयान के बाद एसोसिएशन और सरकार के बीच तकरार और गहराती दिख रही है। इस बंद का असर सीधा राज्य की शैक्षणिक गतिविधियों पर पड़ सकता है।
वहीं, इस पूरे घटनाक्रम के समानांतर छत्तीसगढ़ सरकार ने प्रदेश में बढ़ते तापमान को देखते हुए 20 अप्रैल 2026 से राज्य के सभी स्कूलों में समय से पहले ग्रीष्मकालीन अवकाश की घोषणा कर दी है, जिससे छात्रों और अभिभावकों के बीच भी असमंजस की स्थिति बनी हुई है।
