नई दिल्ली। विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) में अचानक हुए घटनाक्रम ने उच्च शिक्षा जगत को झकझोर कर रख दिया है। यूजीसी के सचिव मनीष जोशी ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। आधिकारिक तौर पर उन्होंने निजी कारण बताए हैं, लेकिन अंदरखाने यह कदम ‘समता विनियम 2026’ को लेकर हुए बड़े विवाद से जुड़ा माना जा रहा है, जिसने उनकी कुर्सी हिला दी।
दरअसल, ‘समता विनियम 2026’ का मसौदा अभी सरकार के स्तर पर विचाराधीन था, लेकिन इसी बीच मनीष जोशी ने बिना किसी उच्चस्तरीय मंजूरी के इसे आयोग के आधिकारिक मंच से जारी कर दिया। इस एक फैसले ने न सिर्फ सरकार को असहज किया, बल्कि मामला तेजी से तूल पकड़ता गया। देशभर में विरोध के स्वर उठे और विवाद सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच गया। स्थिति इतनी बिगड़ी कि जोशी को समर्थन देने से राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ने भी दूरी बना ली।
महाराष्ट्र मूल के मनीष जोशी को फरवरी 2023 में यूजीसी सचिव बनाया गया था। उन्हें संघ के करीबी और भरोसेमंद चेहरे के तौर पर देखा जाता था, लेकिन वही ‘समता विनियम 2026’ उनके करियर के लिए बड़ा झटका साबित हुआ। विवाद भले ही सतह पर शांत होता दिखा, लेकिन इसके असर ने अंततः उनकी विदाई तय कर दी।
जोशी का कार्यकाल 3 फरवरी 2028 तक था, लेकिन अब 11 अप्रैल को उनका अंतिम कार्यदिवस होगा। इसके बाद वे अवकाश पर चले जाएंगे और 25 अप्रैल को औपचारिक रूप से कार्यमुक्त कर दिए जाएंगे। फिलहाल श्यामा रथ को कार्यवाहक सचिव की जिम्मेदारी सौंपी गई है।
इस पूरे घटनाक्रम ने देश की उच्च और तकनीकी शिक्षा व्यवस्था में बड़ा प्रशासनिक संकट खड़ा कर दिया है। अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद (AICTE) पहले से ही बिना स्थायी अध्यक्ष के काम कर रही है, वहीं अब यूजीसी भी स्थायी सचिव और अध्यक्ष के अभाव में है। ऐसे में देश के विश्वविद्यालयों की शीर्ष संस्थाएं फिलहाल नेतृत्वहीन स्थिति में काम करने को मजबूर हैं, जिससे शिक्षा व्यवस्था पर दूरगामी असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है।
