बिलासपुर. छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने प्रदेश के सरकारी स्कूलों में मूलभूत सुविधाओं को लेकर स्कूल शिक्षा विभाग को फटकार लगाई गई है, और स्कूल शिक्षा सचिव से शपथ पत्र में जवाब मांगा है. हाईकोर्ट ने नाराजगी जताते हुए कहा है कि सरकारी स्कूलों में शौचालयों का नहीं होना शर्मनाक है.
दरअसल, स्कूल शिक्षा विभाग से जुड़ी एक याचिका की सुनवाई हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा की डिविजन बेंच ने स्कूल शिक्षा विभाग के सचिव से शपथ पत्र में जवाब मांगा है. बता दें कि, प्रदेश की 5 हजार से अधिक सरकारी स्कूलों में शौचालय नहीं है और यह बात हाईकोर्ट के संज्ञान में आते ही कोर्ट ने टिप्पणी करते हुए इसे शर्मनाक बताया है. जिनमें अधिकांश बालिका विद्यालय शामिल है.
गौरतलब है कि, प्रदेश के सरकारी स्कूलों के जीर्णोद्धार और मरम्मत के लिए राज्य सरकार करोड़ों रुपए खर्च करती है. स्कूल भवनों को मूलभूत सुविधाओं से लैस करने तमाम योजनाएं भी संचालित करती है. बावजूद इसके स्कूल शिक्षा विभाग के ही धरातल पर पदस्थ अधिकारी सरकार की मोटी रकम डकार जाते है. जिसका परिणाम यह है कि आज भी सरकारी स्कूल भवनों की हालत बद से बदतर हो चली है.
स्कूल शिक्षा विभाग में भवनों के मरम्मत को लेकर किस तरीके से भ्रष्टाचार किया गया. उसका ताजा उदाहरण कांग्रेस कार्यकाल के दौरान मुख्यमंत्री शाला जतन योजना में देखने को मिली थी. जिसकी जांच भी मौजूदा सरकार के द्वारा कराई जा रही है और लगभग 2 साल का समय बीतने जा रहा है. जांच की गति को लेकर अब भी स्कूल शिक्षा विभाग यह तय नहीं कर पाया है की गड़बड़ियां कहां हुई है. यह कृत्य दर्शाता है की किस ढर्रे पर विभाग की नींव खुदी हुई है.
फिलहाल हाईकोर्ट की फटकार के बाद अब स्कूल शिक्षा विभाग एक्टिव मोड पर है और उम्मीद है की चौंकाने वाले तथ्य सामने आएंगे.
