दंतेवाड़ा. नक्सल प्रभावित बीजापुर सीमा से लगे तिमिनार गांव में मानवता और साहस की मिसाल पेश करते हुए सीआरपीएफ के जवानों ने तीन माह की गंभीर रूप से बीमार बच्ची की जान बचा ली. देर रात अचानक बच्ची की तबीयत बिगड़ने की सूचना मिलते ही 165वीं बटालियन की चार्ली कंपनी हरकत में आ गई.
सहायक कमांडेंट राजेश गुर्जर के नेतृत्व में जवानों की टीम बिना समय गंवाए दुर्गम और जोखिम भरे रास्तों पर निकल पड़ी. घने जंगल, खराब सड़क और अंधेरे जैसी तमाम बाधाओं के बावजूद टीम गांव तक पहुंची और बच्ची को सुरक्षित बाहर निकाला. इसके बाद उसे तत्काल सीआरपीएफ कैंप लाकर प्राथमिक उपचार दिया गया.
स्थिति की गंभीरता को देखते हुए जवानों ने तुरंत एंबुलेंस की व्यवस्था कर बच्ची को दंतेवाड़ा जिला अस्पताल के लिए रवाना किया. समय रहते मिली मदद और त्वरित कार्रवाई के चलते मासूम की जान बचाई जा सकी.
नक्सल प्रभावित क्षेत्र में इस तरह की तत्परता और संवेदनशीलता ने एक बार फिर साबित कर दिया कि सुरक्षा के साथ-साथ मानव जीवन की रक्षा भी जवानों की सर्वोच्च प्राथमिकता है.
