बलरामपुर. मुख्यालय के नगर पालिका में पेयजल आपूर्ति का टैंकर, ट्रैक्टर ट्राली और बाजार शेड का कबाड़ बेचे जाने का मामला तूल पकड़ता जा रहा है. मुख्य नगर पालिका अधिकारी प्रणव राय पर लग रहे गंभीर आरोप के बाद अब निर्वाचित पार्षदों को कुत्ता की संज्ञा देने से मामला और गंभीर बन गया है. जिसके बाद अब अप्रत्याशित घटना जैसी स्थिति निर्मित होने की संभावनाओं से इनकार नहीं किया जा सकता है. इधर स्थानीय प्रशासन का इस मामले में किसी प्रकार हस्तक्षेप का ना होना भी संदेहास्पद स्थिति को जन्म दे रहा है.
बता दें कि, 02 अप्रैल को निर्दलीय पार्षद अमित गुप्ता (मंटू) ने वेल्डिंग वर्क शॉप के संचालक दीपक गुप्ता को नगर पालिका का टैंकर 20 हजार रुपए में बेचे जाने का आरोप लगाया था. इसके साथ ही नगर पालिका की संपत्ति बाजार शेड के कबाड़ और ट्रैक्टर ट्राली को बेचे जाने का आरोप लगाते हुए भाजपा पार्षद गौतम सिंह ने लिखित शिकायत विभागीय सचिव सहित स्थानीय प्रशासन और पुलिस से की थी. इधर टैंकर बेचे जाने के आरोपों को खारिज करते हुए मुख्य नगर पालिका अधिकारी प्रणव राय ने कहा था की टैंकर बेची नही गई है. मरम्मत के लिए दी गई है. वही पेयजल आपूर्ति के लिए नगर पालिका के टैंकरों का कलर पीले रंग का था. लेकिन बेची गई टैंकर का रंग पीले से नीला रंग का कर दिया गया है.
अब यह मामला जैसे ही पब्लिक डोमेन आया नगर पालिका अधिकारी का एक ऑडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हो गया. जिसमें वे पार्षदों को कुत्ता कहते सुनाई दे रहे है. जिसके बाद अब यह मामला गंभीर प्रवृत्ति का हो गया है और इस मामले में स्थानीय प्रशासन की हस्तक्षेप की दरकार है.
नगर पालिका के अधीन चल और अचल संपत्तियों के क्रय और विक्रय की एक प्रक्रिया है. जिसके तहत प्रस्ताव और स्वीकृति दोनों को हरी झंडी मिलना अनिवार्य है. जबकि ऐसी कोई प्रक्रिया टैंकर बिक्री के लिये हुई ही नहीं.
नगर पालिका परिषद यानी नगर सरकार जो नगर के विकास के लिये प्रतिबद्ध है. जहां निर्वाचित जनप्रतिनिधि और सरकार के अधिकारी नागरिकों की समस्याओं का समाधान करते है. लेकिन इन दिनों नगर पालिका परिषद से अखाड़ा परिषद बन चुकी मुख्यालय की नगर पालिका से आखिर यह कैसे उम्मीद की जाये. की यहां की ट्रिपल इंजन सरकार बलरामपुर के विकास को गति देगी समझ से परे है.
