नई दिल्ली. नए वित्त वर्ष की शुरुआत के साथ 1 अप्रैल से देशभर में कई अहम वित्तीय नियम बदल गए हैं, जिनका सीधा असर आम लोगों की जेब, डिजिटल पेमेंट और बैंकिंग आदतों पर पड़ने वाला है. हाईवे टोल से लेकर ATM चार्ज और PAN नियमों तक, ये बदलाव रोजमर्रा की जिंदगी को प्रभावित करेंगे.
सबसे पहले बात FASTag की करें तो भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण ने सालाना पास की फीस में बढ़ोतरी कर दी है. अब यह पास 3000 रुपये से बढ़कर 3075 रुपये का हो गया है. यानी वाहन चालकों को अब हर साल 75 रुपये ज्यादा चुकाने होंगे.
बैंकिंग सेक्टर में भी बड़ा बदलाव हुआ है. HDFC Bank ने ATM से जुड़े नियम अपडेट किए हैं. अब UPI के जरिए ATM से कैश निकालना भी फ्री ट्रांजैक्शन लिमिट में गिना जाएगा. जैसे ही आपकी मुफ्त लिमिट खत्म होगी, हर ट्रांजैक्शन पर 23 रुपये और टैक्स देना होगा. पहले यह नियम केवल कार्ड के जरिए निकासी पर लागू होता था.
PAN कार्ड से जुड़े नियम भी बदल गए हैं. अब केवल आधार के जरिए PAN के लिए आवेदन करना संभव नहीं होगा. इसके लिए अलग-अलग कैटेगरी के अनुसार फॉर्म भरना अनिवार्य कर दिया गया है, जिससे प्रक्रिया अधिक व्यवस्थित लेकिन थोड़ी सख्त हो गई है.
डिजिटल पेमेंट को और सुरक्षित बनाने के लिए भारतीय रिज़र्व बैंक ने बड़ा कदम उठाया है. 1 अप्रैल 2026 से सभी डिजिटल लेन-देन के लिए टू-फैक्टर ऑथेंटिकेशन (2FA) अनिवार्य कर दिया गया है. इसका मतलब है कि अब हर ऑनलाइन भुगतान में अतिरिक्त सुरक्षा परत लागू होगी, जिससे धोखाधड़ी के मामलों में कमी आने की उम्मीद है.
वहीं नौकरीपेशा लोगों के लिए राहत की खबर भी आई है. मील कार्ड या फूड वाउचर पर मिलने वाली टैक्स छूट को बढ़ा दिया गया है. अब प्रति मील 200 रुपये तक टैक्स फ्री मिलेगा, जो पहले सिर्फ 50 रुपये था. नए नियमों के तहत कर्मचारी सालाना करीब 1 लाख रुपये तक टैक्स बचा सकते हैं.
इन बदलावों के साथ साफ है कि नया वित्त वर्ष आम लोगों के लिए कुछ मामलों में खर्च बढ़ाने वाला तो कुछ मामलों में राहत देने वाला साबित होगा. ऐसे में इन नियमों को समझना और अपनी फाइनेंशियल प्लानिंग उसी हिसाब से करना बेहद जरूरी हो गया है.
