तेहरान/तेल अवीव/बेरूत/वाशिंगटन। मध्य-पूर्व में ईरान, इजराइल और उनके सहयोगी गुटों के बीच जारी तनाव अब व्यापक युद्ध के रूप में बदलता नजर आ रहा है। 28 फरवरी से शुरू हुई इस लड़ाई ने धीरे-धीरे पूरे क्षेत्र को अपनी चपेट में ले लिया है, जहां तेल और गैस आपूर्ति पर निर्भर वैश्विक अर्थव्यवस्था पर भी असर दिखने लगा है। ईरान और इजराइल के साथ-साथ लेबनान में भी लगातार मिसाइल, रॉकेट और ड्रोन हमलों की खबरें सामने आ रही हैं, जिससे आम जनजीवन बुरी तरह प्रभावित हो रहा है।
रिपोर्ट्स के मुताबिक, ईरान की राजधानी के पूर्वी हिस्से में तड़के धमाकों की आवाजें सुनी गईं, जहां बमबारी में रिहायशी इलाकों और एक स्कूल के तबाह होने की बात कही जा रही है। वहीं इजराइल के मध्य हिस्सों में ईरान की ओर से दागे गए प्रोजेक्टाइल के बाद हवाई हमले के सायरन बज उठे, जिससे लोगों में दहशत फैल गई। इजराइली सेना ने भी दक्षिणी लेबनान में हिजबुल्लाह के ठिकानों पर जवाबी कार्रवाई की पुष्टि की है।
उधर, ईरान समर्थित समूहों की ओर से इजराइल के तेल अवीव और उत्तरी क्षेत्रों पर मिसाइल हमले किए जाने की खबर है, जिसमें हताहतों और घायलों की सूचना भी सामने आई है। इसी बीच इराकी इस्लामिक रेजिस्टेंस ग्रुप ने अमेरिकी ठिकानों पर कई हमलों का दावा किया है, जिससे क्षेत्रीय तनाव और बढ़ गया है। कुवैत और जॉर्डन से भी ड्रोन और मिसाइल हमलों से जुड़ी घटनाओं की रिपोर्ट सामने आई है, जबकि सऊदी अरब ने अपने एयर डिफेंस सिस्टम द्वारा मिसाइल और ड्रोन को नष्ट करने का दावा किया है।
इसी बीच अंतरराष्ट्रीय मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि अमेरिकी रक्षा विभाग मध्य-पूर्व में 82वीं एयरबोर्न डिवीजन के पैराट्रूपर्स की तैनाती पर विचार कर रहा है। बताया जा रहा है कि इस संभावित कदम को लेकर वॉशिंगटन में शीर्ष नेतृत्व स्तर पर उच्चस्तरीय चर्चा हुई है। साथ ही होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर भी चिंता जताई जा रही है, जो वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है।
