वाशिंगटन/दुबई. मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव के बीच वैश्विक ऊर्जा बाजार में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है. खाड़ी देशों के ऊर्जा ठिकानों पर ईरान के लगातार हमलों से पैदा हुए संकट के बीच अमेरिका अब अपनी रणनीति में नरमी लाने के संकेत दे रहा है. रिपोर्ट्स के मुताबिक, United States ईरानी तेल पर लगाए गए प्रतिबंधों में आंशिक ढील देने पर विचार कर रहा है.
The Washington Post की रिपोर्ट के अनुसार, हालात को देखते हुए अमेरिकी प्रशासन उस ईरानी कच्चे तेल पर से प्रतिबंध हटाने की तैयारी में है, जो पहले से ही टैंकरों में लोड हो चुका है. अमेरिकी ट्रेजरी सेक्रेटरी Scott Bessent ने संकेत दिया कि यह कदम वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति को स्थिर करने के लिए उठाया जा सकता है.
दरअसल, Iran द्वारा फारस की खाड़ी क्षेत्र में ऊर्जा इंफ्रास्ट्रक्चर पर बढ़ते हमलों ने वैश्विक तेल आपूर्ति को लेकर गंभीर चिंता पैदा कर दी है. Ras Laffan Industrial City पर हुए हमले के बाद स्थिति और ज्यादा संवेदनशील हो गई है. यह क्षेत्र दुनिया की सबसे बड़ी लिक्विफाइड नेचुरल गैस (LNG) सुविधाओं में से एक माना जाता है.
इस बीच Donald Trump ने ईरान को कड़ी चेतावनी देते हुए कहा कि यदि कतर पर दोबारा हमला हुआ तो अमेरिका South Pars Gas Field को निशाना बना सकता है. यह दुनिया के सबसे बड़े गैस भंडारों में शामिल है.
अमेरिकी प्रशासन के मुताबिक करीब 140 मिलियन बैरल ईरानी तेल ऐसे टैंकरों में मौजूद है, जिन पर प्रतिबंध हटाने पर विचार किया जा रहा है. इससे उस तेल को नए बाजार मिल सकते हैं, जो फिलहाल रियायती दरों पर मुख्य रूप से China को बेचा जा रहा है. प्रतिबंधों में ढील मिलने पर यह तेल एशिया के अन्य देशों तक बाजार मूल्य पर पहुंच सकता है.
विशेषज्ञों का मानना है कि अगर यह फैसला लागू होता है, तो इससे वैश्विक तेल कीमतों में स्थिरता आ सकती है, लेकिन साथ ही यह मध्य पूर्व की राजनीति और शक्ति संतुलन पर भी बड़ा असर डाल सकता है. वर्तमान हालात में ऊर्जा, कूटनीति और सैन्य रणनीति एक-दूसरे से जुड़ते नजर आ रहे हैं, जिससे आने वाले दिनों में वैश्विक बाजार और ज्यादा संवेदनशील बना रह सकता है.
