बिलासपुर। छत्तीसगढ़ के बिलासपुर से सरकारी सिस्टम की बड़ी लापरवाही का चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जहां एक जीवित महिला को सरकारी रिकॉर्ड में मृत घोषित कर दिया गया। इस चूक का खामियाजा उसे महतारी वंदन योजना की राशि बंद होने के रूप में भुगतना पड़ा और अब वह खुद को जिंदा साबित करने के लिए दफ्तर-दफ्तर भटकने को मजबूर है।
तिफरा निवासी अमरिका बाई को योजना की राशि मिलना अचानक बंद हो गई। कारण जानने पर खुलासा हुआ कि रिकॉर्ड में उन्हें मृत दर्ज कर दिया गया है। परेशान महिला ने बुधवार को जनदर्शन में पहुंचकर कलेक्टर संजय अग्रवाल से गुहार लगाई। उन्होंने बताया कि इस गलती के चलते वह मानसिक, शारीरिक और आर्थिक रूप से परेशान हैं और कई कार्यालयों के चक्कर काट चुकी हैं।
अमरिका बाई को अब तक योजना की केवल पांच किस्तें ही मिल पाई हैं। गलत एंट्री के कारण आगे की पूरी राशि रोक दी गई। मामले की गंभीरता को देखते हुए कलेक्टर ने महिला एवं बाल विकास विभाग के अधिकारियों को तत्काल जांच कर समस्या का निराकरण करने के निर्देश दिए हैं।
जनदर्शन में सिर्फ यही मामला नहीं उठा, बल्कि कई अन्य शिकायतों ने भी प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए। धुरीपारा मंगला निवासी पुरुषोत्तम पटेल ने बताया कि उनकी कृषि भूमि में उनके पिता की जगह किसी अन्य व्यक्ति का नाम ऑनलाइन दर्ज हो गया है। वहीं बेलगहना के प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र के एक सेवानिवृत्त कर्मचारी ने जीपीएफ राशि के भुगतान में देरी की शिकायत की।
सीपत तहसील के उच्चभट्ठी गांव के किसानों ने किसान सम्मान निधि नहीं मिलने की समस्या उठाई, जबकि आजाद नगर निवासी शैलेन्द्र सिंह ठाकुर ने नेहरू नगर स्थित श्रीराम केयर अस्पताल में आयुष्मान योजना के मरीजों के साथ दुर्व्यवहार का आरोप लगाया। इस पर कलेक्टर ने जांच के निर्देश दिए हैं।
इधर विजयपुर गांव से भी गंभीर शिकायत सामने आई, जहां प्राइमरी स्कूल के शिक्षकों अभिमन्यु मरकाम और भरत ध्रुव पर शराब पीकर स्कूल आने, हंगामा करने और बच्चों को ठीक से न पढ़ाने के आरोप लगे हैं। इस मामले को गंभीरता से लेते हुए कलेक्टर ने जिला शिक्षा अधिकारी को जांच कर सख्त कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं।
जनदर्शन में सामने आई इन शिकायतों ने साफ कर दिया है कि सरकारी रिकॉर्ड की छोटी-सी गलती आम लोगों के लिए कितनी बड़ी परेशानी बन सकती है।
