नई दिल्ली। पेट्रोल-डीजल की महंगाई से जूझ रहे आम लोगों के लिए बजट 2026 एक बड़ी राहत लेकर आया है। सरकार ने CNG उपभोक्ताओं को सीधा फायदा देने वाला ऐसा फैसला किया है, जिससे न सिर्फ गाड़ी चलाना सस्ता होगा, बल्कि पर्यावरण को भी मजबूती मिलेगी। खेतों में जलने वाली पराली, शहरों के कचरे और जैविक अपशिष्ट से तैयार होने वाली बायोगैस अब सिर्फ हरित ऊर्जा का विकल्प नहीं, बल्कि जेब पर बोझ कम करने वाला ईंधन बनने जा रही है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बजट भाषण में बायोगैस मिश्रित CNG को लेकर बड़ा ऐलान करते हुए इसके टैक्स ढांचे में अहम बदलाव किया है।
अब बायोगैस मिक्स CNG पर सेंट्रल एक्साइज ड्यूटी की गणना करते समय बायोगैस के मूल्य को पूरी तरह बाहर रखा जाएगा। आसान शब्दों में कहें तो CNG में जितना हिस्सा बायोगैस का होगा, उस पर कोई एक्साइज ड्यूटी नहीं लगेगी। पहले टैक्स कैलकुलेशन में बायोगैस की कीमत भी जोड़ दी जाती थी, जिससे CNG अपेक्षाकृत महंगी पड़ती थी, लेकिन अब यह अतिरिक्त बोझ खत्म हो गया है।
अब तक रेगुलर CNG पर करीब 14 प्रतिशत सेंट्रल एक्साइज ड्यूटी लगती थी, जिससे प्रति किलो कीमत में 14 से 15 रुपये तक का टैक्स जुड़ जाता था। साल 2023 में सरकार ने आंशिक राहत देते हुए बायोगैस पर चुकाए गए GST को एक्साइज ड्यूटी से घटाने की व्यवस्था की थी, लेकिन बायोगैस के पूरे मूल्य को छूट नहीं मिलने के कारण कीमतों में खास कमी नहीं आ पाई थी। बजट 2026 में इस कमी को दूर करते हुए सरकार ने बायोगैस के पूरे मूल्य पर टैक्स शून्य कर दिया है।
इस नई व्यवस्था के लागू होने से बायोगैस मिश्रित CNG की कीमत प्रति किलो कुछ रुपये तक कम हो सकती है। इसका सीधा फायदा उन लाखों लोगों को मिलेगा, जो रोजाना CNG से चलने वाली कारों, ऑटो और टैक्सियों का इस्तेमाल करते हैं। कमर्शियल वाहन ऑपरेटरों के लिए भी यह फैसला राहत भरा है, क्योंकि डीजल के मुकाबले उन्हें अब और सस्ता व स्वच्छ विकल्प मिलेगा।
सरकार का मानना है कि इस कदम से न केवल लोगों का ईंधन खर्च घटेगा, बल्कि बायोगैस उत्पादन को भी बढ़ावा मिलेगा। कृषि अवशेष और शहरी कचरे के बेहतर इस्तेमाल से प्रदूषण में कमी आएगी और साथ ही देश की विदेशी तेल पर निर्भरता भी घटेगी। कुल मिलाकर, बजट 2026 में CNG और बायोगैस को लेकर लिया गया यह फैसला आम आदमी की जेब और पर्यावरण.. दोनों के लिए फायदे का सौदा साबित हो सकता है।
