वॉशिंगटन/तेहरान। पश्चिम एशिया में तनाव एक नए और बेहद खतरनाक मोड़ पर पहुंच गया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के सीधे आदेश पर अमेरिकी सेना ने शनिवार को लगातार आठवीं रात ईरान के सैन्य ठिकानों पर भीषण हवाई हमले किए। अमेरिकी रक्षा मंत्रालय के मुख्यालय पेंटागन ने साफ कर दिया है कि यह आक्रामक कार्रवाई जॉर्डन में एक अमेरिकी सैन्य बेस पर हुए उस ईरानी हमले का करारा जवाब है, जिसमें दो अमेरिकी सैनिकों को अपनी जान गंवानी पड़ी थी। इस ताजा सैन्य कार्रवाई के बाद दोनों महाशक्तियों के बीच सीधे युद्ध का खतरा मंडराने लगा है।
अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने इस सैन्य कार्रवाई की पुष्टि करते हुए सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर एक आधिकारिक बयान जारी किया है। सेंटकॉम के मुताबिक, कमांडर-इन-चीफ के निर्देश पर शनिवार शाम ठीक 6 बजे ईरान के खिलाफ एक नया और व्यापक हवाई हमला शुरू किया गया। अमेरिकी सेना का मुख्य उद्देश्य होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में अंतरराष्ट्रीय कमर्शियल शिपिंग के लिए खतरा बन चुकी ईरान की सैन्य क्षमता को पूरी तरह से नेस्तनाबूद करना है। इसके साथ ही, यह कार्रवाई सीधे तौर पर इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) के उन बलों को सबक सिखाने के लिए की गई है, जिन्होंने जॉर्डन में अमेरिकी ठिकाने को निशाना बनाया था।
शनिवार रात हुए इस नए हमले में अमेरिका ने अपने अत्याधुनिक लड़ाकू विमानों और क्रूज मिसाइलों का इस्तेमाल किया। सैन्य सूत्रों के अनुसार, इस बार अमेरिकी हमलों का मुख्य फोकस दक्षिणी ईरान के तटीय इलाके रहे, जहां सिरीक, हाजीआबाद, बंदर अब्बास और केश्म द्वीप पर स्थित ईरानी सैन्य ठिकानों को बमबारी कर मलबे में तब्दील कर दिया गया। गौरतलब है कि पिछले आठ दिनों से जारी इस सिलसिलेवार कार्रवाई में अमेरिका ने ईरान के बुनियादी ढांचे को भारी नुकसान पहुंचाया है, जिसमें कई महत्वपूर्ण पुल, रेलवे स्टेशन, एयरपोर्ट, बिजली ग्रिड और एक प्रमुख वॉटर प्लांट शामिल हैं।
दूसरी तरफ, ईरान ने भी अमेरिका के इन हमलों के सामने घुटने टेकने से इनकार कर दिया है। ईरानी सेना ने खाड़ी देशों में मौजूद अमेरिकी ठिकानों को निशाना बनाकर बड़े पैमाने पर पलटवार शुरू कर दिया है। ईरान ने कुवैत और बहरीन में तैनात अमेरिकी सेना और उनके पांचवें बेड़े (Fifth Fleet) के कमांड सेंटरों पर एक के बाद एक कई आत्मघाती ड्रोन और बैलिस्टिक मिसाइलें दागी हैं। ईरान के इस आक्रामक रुख को देखते हुए इराक के इरबिल शहर में स्थित अमेरिकी वाणिज्य दूतावास (Consulate) में हड़कंप मच गया और आनन-फानन में हवाई हमलों को रोकने के लिए वहां मौजूद एयर डिफेंस सिस्टम को सक्रिय करना पड़ा।
इस भीषण सैन्य टकराव के बीच जान-माल का नुकसान भी लगातार बढ़ता जा रहा है। ईरान के स्वास्थ्य मंत्रालय द्वारा जारी आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, 27 जून से 18 जुलाई के बीच हुए इन अमेरिकी हवाई हमलों में अब तक 50 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 500 से अधिक लोग गंभीर रूप से घायल हैं। अंतरराष्ट्रीय विश्लेषकों का मानना है कि यदि दोनों देशों ने तुरंत संयम नहीं बरता, तो यह टकराव एक बड़े क्षेत्रीय युद्ध में बदल सकता है, जिसका असर पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था पर पड़ेगा।
