नई दिल्ली. ओडिशा में वन विभाग के अधिकारियों की घोर लापरवाही और आपराधिक मानसिकता का सनसनीखेज मामला सामने आया है. संदिग्ध रूप से करंट लगने से एक जंगली हाथी की मौत के बाद उसके शव को नियमों के अनुसार जांच और सूचना देने के बजाय 32 टुकड़ों में काट दिया गया और कंधमाल व कालाहांडी जिलों की अलग-अलग जगहों पर चुपचाप दफना दिया गया. यह खुलासा सोमवार को विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने किया, जिसके बाद पूरे वन महकमे में हड़कंप मच गया है.
जानकारी के मुताबिक, कंधमाल जिले के बालिगुडा वन प्रभाग क्षेत्र में हाथी की मौत हुई थी. आरोप है कि विभागीय कार्रवाई और जवाबदेही से बचने के लिए स्थानीय वन अधिकारियों ने बिना किसी उच्च अनुमति और आधिकारिक सूचना के शव का निपटान कर दिया. प्रारंभिक जांच में सामने आया कि शव को ले जाने में आसानी के लिए उसे 32 हिस्सों में काटा गया, जो सीधे तौर पर सबूतों से छेड़छाड़ और वन्यजीव अपराध की श्रेणी में आता है.
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ब्रह्मपुर के क्षेत्रीय मुख्य वन संरक्षक (आरसीसीएफ) विश्वनाथ नीलन्नवर ने बताया कि जांच के दौरान कालाहांडी जिले के ताहनसिर और कंधमाल जिले के झिरीपानी इलाके से हाथी के शव के टुकड़े बरामद किए गए हैं. इस मामले में बेलघर के प्रभारी रेंजर बिनय कुमार बिशी और अन्य के खिलाफ तथ्यों को छिपाने और सबूत नष्ट करने के आरोप में वन्यजीव अपराध का मामला दर्ज किया गया है. बिशी को तत्काल निलंबित कर दिया गया है, जबकि वह फिलहाल फरार बताया जा रहा है. उसकी गिरफ्तारी के लिए तलाशी अभियान जारी है.
जांच में यह भी सामने आया है कि शव के टुकड़ों को इधर-उधर ले जाने के लिए कथित तौर पर तीन वाहनों का इस्तेमाल किया गया था, जिन्हें जब्त कर लिया गया है. वाहन मालिकों में से एक हृषिकेश पांडा को गिरफ्तार कर लिया गया है और उससे पूछताछ की जा रही है.
इस गंभीर मामले पर वन, पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री गणेश राम सिंहखुंटिया ने कड़ा रुख अपनाते हुए कहा है कि इस अपराध में शामिल पाए जाने वाले वन अधिकारियों और अन्य सभी दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी और किसी को भी बख्शा नहीं जाएगा. वहीं, मामले के जांच अधिकारी सहायक वन संरक्षक, बालिगुडा ने शिकार-रोधी दस्ते के आठ सदस्यों को नोटिस जारी कर मुख्यालय न छोड़ने और जरूरत पड़ने पर जांच में उपस्थित होने के निर्देश दिए हैं.
हाथी की उम्र, लिंग और मौत के वास्तविक कारणों का पता लगाने के लिए शव के नमूनों को ओडिशा यूनिवर्सिटी ऑफ एग्रीकल्चर एंड टेक्नोलॉजी (ओयूएटी) की फॉरेंसिक प्रयोगशाला भेजा गया है.
