नई दिल्ली. संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) ने सिविल सेवा परीक्षा को लेकर एक बड़ा और सख्त बदलाव करते हुए नई गाइडलाइन्स जारी की हैं. आयोग के ताजा निर्देशों के मुताबिक अब जो उम्मीदवार पहले ही IAS या IFS अधिकारी के रूप में नियुक्त हो चुके हैं, वे दोबारा UPSC की सिविल सेवा परीक्षा (CSE) में हिस्सा नहीं ले सकेंगे. यह नियम CSE 2026 से प्रभावी माना जा रहा है.
UPSC द्वारा जारी नियमों में स्पष्ट किया गया है कि यदि कोई उम्मीदवार पिछली परीक्षा के परिणाम के आधार पर भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) या भारतीय विदेश सेवा (IFS) में चयनित होकर उस सेवा का सदस्य बन चुका है, तो उसे CSE 2026 में बैठने की अनुमति नहीं होगी. आयोग ने यह फैसला सिविल सेवा चयन प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी और निष्पक्ष बनाने के उद्देश्य से लिया है.
UPSC के 4 फरवरी को जारी सर्कुलर में कहा गया है कि यदि कोई अभ्यर्थी CSE 2026 प्रारंभिक परीक्षा देने के बाद IAS या IFS में नियुक्त हो जाता है और सेवा में बना रहता है, तो उसे मुख्य परीक्षा (Mains) 2026 में शामिल होने की अनुमति भी नहीं दी जाएगी. यानी यदि कोई उम्मीदवार मेन्स परीक्षा में शामिल होना चाहता है, तो उसे पहले अपनी मौजूदा नियुक्ति छोड़नी होगी. अन्यथा उसे अयोग्य माना जाएगा, चाहे वह प्रारंभिक परीक्षा पास ही क्यों न कर ले.
इस बदलाव से स्पष्ट संकेत मिलता है कि अब UPSC IAS और IFS अधिकारियों को बार-बार परीक्षा देकर अपनी सेवा बदलने या रैंक सुधारने की अनुमति नहीं देगा. आयोग का मानना है कि चयन के बाद सेवा में रहते हुए दोबारा परीक्षा देना व्यवस्था के लिए अनुचित हो सकता है.
हालांकि, IPS और अन्य केंद्रीय सेवाओं को लेकर नियमों में उतनी कठोरता नहीं रखी गई है. UPSC की गाइडलाइन के अनुसार यदि कोई उम्मीदवार CSE 2026 के आधार पर IPS या केंद्रीय सेवा ग्रुप ‘A’ में चयनित होता है, तो कुछ शर्तों के साथ उसे CSE 2027 में परीक्षा देने का विकल्प दिया जा सकता है.
वहीं, UPSC ने प्रयासों की संख्या को लेकर पुराने नियमों को बरकरार रखा है. सामान्य वर्ग के उम्मीदवारों को कुल 6 प्रयास, OBC और PwBD श्रेणी के उम्मीदवारों को 9 प्रयास, जबकि SC और ST वर्ग के अभ्यर्थियों को असीमित प्रयास करने की अनुमति दी गई है. आयोग ने यह भी स्पष्ट किया है कि प्रारंभिक परीक्षा में भाग लेना ही एक प्रयास माना जाएगा.
UPSC के इस नए निर्णय को सिविल सेवा परीक्षा प्रणाली में एक ऐतिहासिक बदलाव माना जा रहा है, जिससे अब IAS और IFS बनने के बाद उम्मीदवारों के लिए बार-बार परीक्षा देकर सेवा परिवर्तन का रास्ता बंद हो जाएगा.
