अम्बिकापुर। सरगुजा जिले के दुर्गम पहाड़ों और वनांचलों में रहने वाले पहाड़ी कोरवा परिवारों के लिए एक नई सुबह की शुरुआत होने जा रही है। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की संवेदनशील पहल और जिला प्रशासन की सक्रियता से अब सुदूर गांवों में पेयजल संकट का स्थायी समाधान सुनिश्चित कर लिया गया है।
जिले की सात प्रमुख तहसीलों की दुर्गम बसाहटों में कुल 113 हैंडपंप और बोरवेल खनन की योजना को धरातल पर उतारने की तैयारी पूरी हो चुकी है। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट निर्देश दिए थे कि अंतिम छोर पर बैठे व्यक्ति तक शासन की बुनियादी सुविधाएं पहुंचनी चाहिए, जिसके बाद कलेक्टर अजीत वसंत ने एक माह के भीतर सभी कार्यों को पूर्ण करने की समय-सीमा तय कर दी है।
यह पूरी कार्ययोजना जिला खनिज संस्थान न्यास (DMF) मद से संचालित की जा रही है, जिसे हाल ही में पर्यटन मंत्री राजेश अग्रवाल और लुण्ड्रा विधायक प्रबोध मिंज की मौजूदगी में शासी परिषद ने अपनी मंजूरी दी है। जमीनी सर्वे के आधार पर लुण्ड्रा में सबसे अधिक 34, लखनपुर में 22, मैनपाट में 20, सीतापुर में 16, अम्बिकापुर में 11, बतौली में 06 और उदयपुर में 04 हैंडपंपों का खनन किया जाएगा।
कलेक्टर ने सभी जनपद सीईओ को सख्त निर्देश दिए हैं कि पहाड़ी कोरवाओं के घरों तक पानी पहुँचाना प्रशासन की प्राथमिकता है, इसलिए इसमें किसी भी तरह की देरी बर्दाश्त नहीं की जाएगी। आने वाले कुछ हफ्तों में पारंपरिक झिरिया और नालों से पानी लाने की मजबूरी खत्म होगी और हजारों ग्रामीणों को अपने ही घर के पास शुद्ध पेयजल उपलब्ध हो सकेगा।
