बलरामपुर। ग्रामीण स्वास्थ्य सेवाओं की जमीनी हकीकत को उजागर करने वाली एक गंभीर और विचलित करने वाली तस्वीर बलरामपुर जिले के रेवतपुर प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र से सामने आई है। प्रसव पीड़ा से तड़पती एक गर्भवती महिला मंगलवार की सुबह महतारी एक्सप्रेस (102 एंबुलेंस) से समय रहते अस्पताल तो पहुंच गई, लेकिन जीवन रक्षक कहे जाने वाले स्वास्थ्य केंद्र के मुख्य द्वार पर ताला लटका मिला।
दर्द से कराहती प्रसूता को तत्काल चिकित्सकीय सहायता की आवश्यकता थी, मगर अस्पताल परिसर में डॉक्टरों और कर्मचारियों के सरकारी आवास भी सूने पड़े थे। हालत इतनी नाजुक थी कि मरीज को किसी अन्य चिकित्सालय ले जाने का जोखिम नहीं उठाया जा सकता था; नतीजतन, बेबस परिजनों को एंबुलेंस के भीतर ही प्रसव कराने के लिए मजबूर होना पड़ा।
शर्मनाक स्थिति यह रही कि बच्चे की किलकारी गूंजने के बाद भी अस्पताल का ताला नहीं खुला। मौके पर जुटे स्थानीय पंचायत प्रतिनिधियों ने फोन के जरिए स्वास्थ्य विभाग के आला अधिकारियों को पूरी स्थिति से अवगत कराया। घटना के करीब एक घंटे बाद जिला मुख्यालय अम्बिकापुर से एक महिला स्वास्थ्य कर्मी रेवतपुर पहुंची, तब जाकर केंद्र का ताला खुला और जच्चा-बच्चा को आवश्यक प्राथमिक उपचार नसीब हो सका।
इसी दौरान वहां मौजूद लोगों द्वारा बनाया गया वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया, जिसमें बंद अस्पताल, वीरान पड़े सरकारी आवास और एंबुलेंस के भीतर प्रसव की लाचारी साफ दिखाई दे रही है।
मामले की गंभीरता को देखते हुए राजपुर के खंड चिकित्सा अधिकारी (बीएमओ) ने रेवतपुर प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र के प्रभारी चिकित्सा अधिकारी को कारण बताओ नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है। वहीं, मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (सीएमएचओ) विजय सिंह ने स्पष्ट किया है कि बीएमओ से विस्तृत जांच प्रतिवेदन मांगा गया है, जिसके आधार पर दोषी स्वास्थ्य कर्मियों के विरुद्ध नियमानुसार सख्त कार्रवाई की जाएगी।
