सामान्य प्रशासन विभाग के गाइड लाइन की खुलेआम उड़ रही धज्जियां…RES विभाग में 03 वर्षों से काबिज है प्रभारी SDO पुसाम…सियासी हस्तक्षेप में मापदंड हुए दर किनार!..

बलरामपुर..(कृष्णमोहन कुमार )..प्रदेश में सामान्य प्रशासन विभाग के आदेश की खुलेआम धज्जियां सरकारी विभाग ही उड़ा रहे है..वह आदेश जिसमे स्पष्ट शब्दो मे यह आदेशित किया गया है..की वरीयताक्रम के अनुसार ही सीधी भर्ती वाले पदों पर प्रभारी अधिकारी नियुक्त किये जाए ..ताकि विभागीय कार्यो के संचालन में रोस्टर के मुताबिक सीधी भर्ती प्रक्रिया के तहत भर्ती किये जाने वाले पद रिक्त हो..इसके साथ ही 2 व 4 वर्षों के अंतराल में पदोन्नति समिति की बैठक कर समीक्षा की जावे..लेकिन अब इस पर राजनीति अपने चरम पर है..तथा नेताओ के खास-खास लोगो को बगैर वरीयता के ही प्रभार सौपे गए है.

बता दे कि सामान्य प्रशासन विभाग ने वर्ष 2011 में एक आदेश जारी की थी..मगर उसका पालन अब हो नही रहा है..और यह स्थिति खास कर निर्माण से सम्बंधित विभागों में देखने को मिल रही है..जहाँ वरीयता क्रम और विभागीय मापदंडों के दायरे में आने वाले अधिकारियों को दर किनार करते हुए..राजनीतिक रसूख से लबरेज अधिकारियों को पदभार सौपे गए है..

दरअसल वाड्रफनगर विकासखण्ड में ग्रामीण यांत्रिकी विभाग में बतौर सब इंजीनियर राजाराम पुसाम व धर्मेंद्र गुप्ता पदस्थ है..और आज से तीन साल पहले विभाग में एसडीओ स्तर के अधिकारियों की कमी को देखते हुए..प्रभारी एसडीओ पदस्थ किये जाने की प्रक्रिया हुई थी..और भाजपा के एक कद्दावर नेता की अनुशंसा पर तत्कालीन भाजपा सरकार में राजाराम पुसाम को वाड्रफनगर अनुभाग में आरईएस (ग्रामीण यांत्रिकी सेवा) का प्रभारी एसडीओ बनाया गया था..और तब से लेकर अबतक वे इसी पद पर काबिज है..

वही जिन मापदंडों के पालन करने सामान्य प्रशासन विभाग ने जो दिशा निर्देश दिए है..उसे एक सिरे से खारिज कर दिया गया..ऐसा इसलिए हुआ क्योंकि राजाराम पुसाम के नाम की अनुशंसा भाजपा के एक कद्दावर नेता ने की थी..ये नेता रमन सरकार में कैबिनेट में मंत्री भी रहे..और वर्तमान समय मे भाजपा संगठन के ओहदेदार पद में है..

सरकारी दस्तावेजों की माने तो बतौर सब इंजीनियर के पद पर राजाराम पुसाम विभाग में 27.07.2013 में सीधी भर्ती के तहत भर्ती किये गए..जबकि इसी पद पर धर्मेंद्र कुमार गुप्ता 24.08.2011 को सीधी भर्ती प्रक्रिया से भर्ती किये गए..अब सामान्य प्रशासन विभाग का आदेश है..की वरीयता क्रम के अनुसार प्रभारी अधिकारी बनाये जावे..लेकिन एक नेता के कहने पर तत्कालीन अधिकारियों ने सामान्य प्रशासन विभाग के आदेश को एक सिरे नजरअंदाज कर दिया..

बहरहाल यह तो एक ही विभाग का पुलिंदा है..ऐसे और भी निर्माण विभाग है..जहाँ इस तरह के खेल -खेले गए..और ऐसे ही प्रभारी अधिकारी अपने सियासी हुक्मरानों के इशारों पर अपने विभागीय कार्यो को अंजाम दे रहे है..अब देखने वाली बात है..की इस मामले को संज्ञान में लेकर आलाधिकारी क्या कार्यवाही करते है..या फिर उन्हें भी सियासी दांव पेंच से डर लगता है?..