बलरामपुर/कृष्णमोहन कुमार. छत्तीसगढ़ के बलरामपुर जिला मुख्यालय के नगर पालिका में परिषद की बैठक को लेकर एक बार फिर राजनैतिक सरगर्मी तेज हो गई है. नगर पालिका उपाध्यक्ष दिलीप सोनी का कहना है कि मुख्य नगर पालिका अधिकारी ने मनमानी तरीके से परिषद के बैठक के पहले आयोजित की जाने वाली पीआईसी की बैठक आयोजित नहीं की गई, और ना ही नियमानुसार बैठक की सूचना दी गई. जिसको लेकर अब संशय बरकरार है कि पार्षद आज 4 बजे आयोजित होने वाली परिषद की बैठक में शामिल होंगे या नही?
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हालांकि मुख्य नगर पालिका अधिकारी प्रणव राय का कहना है कि परिषद की बैठक आयोजित करना नगर पालिका अध्यक्ष के अधिकार क्षेत्र का है, और अध्यक्ष के द्वारा ही बैठक बुलाई गई है. वहीं 48 घंटे पहले बैठक की सूचना दिए जाने के मामले पर उन्होंने कहा कि इसके पूर्व भी बैठक की सूचना दी गई थी. वहीं बैठक की सूचना 7 दिन से 3 दिनों के भीतर पार्षदों को दी जानी चाहिए थी, जबकि 48 घंटे पहले पार्षदों को सूचना दी गई.
परिषद की बैठक से पूर्व पीआईसी की बैठक आयोजित की जाती है. जिसमें परिषद की बैठक में प्रस्तावित किए जाने वाले एजेंडा तैयार किये जाते है, और फिर उन्हीं एजेंडों पर चर्चा कर प्रस्ताव पारित की जाती है. आज आयोजित होने वाली परिषद की बैठक में जाति प्रमाण पत्र के आवेदनों, नगर पालिका कार्यालय के रंग रोगन, वार्ड क्रमांक 06 के चौड़ीकरण, भूतपूर्व पार्षदों के मानदेय सहित 10 एजेंडों पर चर्चा होनी थी. अब सवाल यह है कि जब पीआईसी की बैठक आयोजित ही नहीं हुई तो फिर एजेंडा कैसे तय कर लिए गए?
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बता दें कि, मुख्य नगर पालिका अधिकारी और पार्षदों के बीच पिछले कुछ दिनों से आपसी खींचतान बनी हुई है. भीतर खाने से तो यह भी चर्चा है कि कुछ पार्षद नगरीय प्रशासन मंत्री अरुण साव से मुख्य नगर पालिका अधिकारी की शिकायत करने की रणनीति तैयार कर रहे है, लेकिन रणनीति पर भी कशमकश पखवाड़े पूर्व से बनी हुई है, और ऐसे में नगर के प्रतिनिधि पार्षद और मुख्य नगर पालिका अधिकारी के बीच रार की दीवार खींची हो.. तो हो सकता है नगर का विकास कार्य भी प्रभावित हो.
फिलहाल, शाम 4 बजे आयोजित होने वाली बैठक आयोजित हो पाती है या फिर पार्षद बहिष्कार करते है यह देखने वाली बात होगी.
