रायपुर। छत्तीसगढ़ के राजनांदगांव जिले में दो प्रमुख सड़क परियोजनाओं में घटिया निर्माण और बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार के आरोपों के बाद लोक निर्माण विभाग (PWD) ने सख्त रुख अपनाया है। विभाग ने राजनांदगांव-खैरागढ़ मुख्य मार्ग के नवीनीकरण-उन्नयन कार्य और राजनांदगांव-मोहला-मानपुर सड़क परियोजना की जांच के लिए शनिवार को चार वरिष्ठ अधिकारियों की एक उच्चस्तरीय समिति गठित की है। यह जांच दल सीधे निर्माण स्थल के तकनीकी मानकों और वित्तीय अनियमितताओं की पड़ताल कर ठीक तीन दिनों के भीतर प्रमुख अभियंता (Engineer-in-Chief) को अपनी विस्तृत रिपोर्ट सौंपेगा। समिति में मुख्य अभियंता वी.एस. कोरम, अधीक्षण अभियंता राजीव नशीने के अलावा कार्यपालन अभियंता प्रभात सक्सेना और सी.एस. ओगरे को शामिल किया गया है।
जांच समिति केवल सतही निरीक्षण तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि पूरी सड़क की गुणवत्ता को किसी स्वतंत्र और निष्पक्ष तकनीकी एजेंसी से भी परखा जाएगा। इस दौरान प्रयोगशाला में बिटुमिन (डामर) का अनुपात, सड़क की वास्तविक मोटाई, घनत्व, जीएसबी (Granular Sub-Base), डब्ल्यूएमएम (Wet Mix Macadam) सब-ग्रेड, ग्रेडेशन, लेवल और सड़क के अंडुलेशन (उबड़-खाबड़पन) जैसे कड़े तकनीकी मानकों की सघन जांच होगी।
इसके साथ ही समिति निर्माण कार्य की गुणवत्ता के लिए जिम्मेदार अधिकारियों और ठेकेदार एजेंसी की संलिप्तता की पहचान करेगी। रिपोर्ट में जांच पूरी होने तक संबंधित प्रोजेक्ट्स के सरकारी भुगतान पर तुरंत रोक लगाने, भ्रष्टाचार व मानकों से खिलवाड़ साबित होने पर सख्त दंडात्मक कार्रवाई करने और डोंगरगांव-कुमरदा जैसे संवेदनशील हिस्सों में जहां सड़क खोदकर छोड़ दी गई है, वहां तुरंत मरम्मत, चेतावनी बोर्ड और सुगम वैकल्पिक मार्ग बहाल करने की सिफारिशें शामिल रहेंगी।
