
बिलासपुर। छत्तीसगढ़ के बिलासपुर जिले के सीपत स्थित एनटीपीसी प्लांट में बुधवार को बड़ा औद्योगिक हादसा हो गया। यहां 60 टन वजनी ऐश टैंक गिरने से करीब 60 मजदूर उसके नीचे दब गए। अब तक 7 मजदूरों को बाहर निकाला गया, जिनमें से 2 की मौत हो चुकी है, जबकि 5 की हालत गंभीर बताई जा रही है। घटनास्थल पर रेस्क्यू ऑपरेशन युद्धस्तर पर जारी है और पूरे इलाके में हाहाकार का माहौल है।
जानकारी के मुताबिक, हादसा एनटीपीसी के बॉयलर मेंटेनेंस डिपार्टमेंट में हुआ, जहां एनुअल मेंटेनेंस का काम चल रहा था। उसी दौरान भारी-भरकम ऐश टैंक मजदूरों पर आ गिरा। चश्मदीदों के अनुसार हादसा इतना जबरदस्त था कि आसपास का इलाका थर्रा उठा।
जैसे ही घटना की खबर फैली, प्लांट प्रशासन और स्थानीय पुलिस मौके पर पहुंची और राहत-बचाव का कार्य शुरू किया गया। हालांकि भारी उपकरणों और मशीनों की कमी से रेस्क्यू कार्य में काफी कठिनाई आ रही है। एनडीआरएफ और दमकल टीमों को भी मौके पर बुलाया गया है।
क्या सुरक्षा मानकों की खुली उड़ रही हैं धज्जियां?
यह कोई पहली बार नहीं है जब औद्योगिक लापरवाही का खामियाजा मजदूरों को अपनी जान गंवाकर भुगतना पड़ा है। कुछ ही दिन पहले मुंगेली जिले के सरगांव में एक स्टील प्लांट की निर्माणाधीन चिमनी गिरने से 30 मजदूर दब गए थे, जिनमें कई की जान चली गई। और अब एनटीपीसी सीपत में हुआ यह हादसा एक बार फिर सुरक्षा मानकों पर गंभीर सवाल खड़े करता है।
प्रश्न यह उठता है कि, क्या इस टैंक की समय पर जांच हुई थी? क्या मेंटेनेंस कार्य के दौरान पर्याप्त सुरक्षा उपकरण मौजूद थे? मजदूरों को खतरे से बचाने के लिए कौन-सी व्यवस्था थी? और सबसे अहम, क्या मजदूरों की जान की कीमत इस सिस्टम के लिए कुछ भी नहीं है?